नोएडा। नोएडा के पॉश इलाकों में शुमार सेक्टर-150 और उसके आसपास के 13 सेक्टरों के निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। लंबे इंतजार और एक दर्दनाक हादसे के बाद आखिरकार नोएडा प्राधिकरण की नींद टूटी है। जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन हुआ है।
इस योजना के तहत सेक्टर-150 समेत कुल 13 सेक्टरों (151 से 162 तक) में बारिश के पानी की निकासी के लिए नए नाले और रेगुलेटर का निर्माण किया जाएगा। करीब 31 करोड़ रुपये की इस परियोजना का पूरा खर्च नोएडा प्राधिकरण उठाएगा, जबकि निर्माण कार्य का जिम्मा सिंचाई विभाग के पास होगा। जल्द ही सिंचाई विभाग टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसी का चयन करेगा।
दुर्घटना के बाद जागी व्यवस्था
यह विडंबना ही है कि हमारे तंत्र में फाइलें तब तक आगे नहीं बढ़तीं, जब तक कोई बड़ी त्रासदी न हो जाए। सेक्टर-150 के जलभराव की यह योजना 2023 में ही तैयार हो गई थी। संयुक्त निरीक्षण भी हो चुका था, लेकिन फिर फाइल ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दी गई। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा 16 जनवरी को सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
वर्तमान में सेक्टर-150 और आसपास के सेक्टरों का ड्रेनेज सिस्टम काफी लचर है। इन सेक्टरों का पानी सेक्टर-168 की तरफ ले जाकर यमुना में गिराया जाता है। चूंकि ये सेक्टर भौगोलिक रूप से निचले इलाकों में हैं, इसलिए बारिश के समय जब यमुना का जलस्तर बढ़ता है, तो सेक्टर-135 का रेगुलेटर बंद कर दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि पानी वापस लौटने लगता है और पूरे इलाके में जलभराव हो जाता है।
अब नई योजना के तहत, पानी को घुमाकर ले जाने के बजाय सीधे सेक्टर-150 से हिंडन नदी में गिराने के लिए नाला बनाया जाएगा। इससे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में भी निकासी बाधित नहीं होगी।
निवासियों की उम्मीदें और सवाल
स्थानीय निवासियों के लिए यह प्रोजेक्ट किसी वरदान से कम नहीं है, लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है। क्या टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य समय पर पूरा होगा? या फिर हर बार की तरह इस बार भी मानसून आने के बाद प्राधिकरण केवल ‘खानापूर्ति’ करता नजर आएगा?
नोएडा प्राधिकरण को यह समझना होगा कि बुनियादी ढांचा केवल कागजों और एमओयू तक सीमित नहीं होना चाहिए। 31 करोड़ रुपये का यह बजट जनता की गाढ़ी कमाई का है, और इसका सही इस्तेमाल तभी माना जाएगा जब आने वाली बारिश में सेक्टर-150 की सड़कें तालाब में तब्दील न हों।
अब देखना यह है कि सिंचाई विभाग कितनी तेजी से एजेंसी का चयन कर धरातल पर काम शुरू करता है। क्या प्रशासन इस बार वाकई गंभीर है, या यह केवल हादसे के बाद के गुस्से को शांत करने की एक कोशिश है?
— माई सिटी रिपोर्टर


