ग्रेटर नोएडा: लंबे समय से अपने सपनों के घर या कॉमर्शियल स्पेस का इंतजार कर रहे ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम के करीब 2300 खरीदारों के लिए आखिरकार आशा की किरण जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के अधूरे पड़े कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समाधान योजना को बहाल कर दिया है। अब अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट नाम की नई कंपनी इन प्रोजेक्टों का अधिग्रहण कर इन्हें जल्द से जल्द पूरा करेगी।
10 साल का लंबा इंतजार खत्म ये प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा में स्थित ‘अर्थ टेकवन’ और ‘अर्थ सैफायर कोर्ट’ और गुरुग्राम का कॉमर्शियल प्रोजेक्ट ‘अर्थ कोपिया’ हैं। इन प्रोजेक्टों में निवेश करने वाले खरीदार पिछले लगभग 10 सालों से अपने यूनिट मिलने का इंतजार कर रहे थे। अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्टों के लिए एनसीएलटी ने पहले अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन एनसीएलएटी ने 31 जनवरी, 2023 को इस योजना को खारिज कर दिया था, जिससे खरीदारों की उम्मीदों को धक्का लगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला अब सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए एनसीएलएटी के उस फैसले को पलट दिया है और कंपनी की समाधान योजना को बहाल कर दिया है। इस फैसले के बाद, इन तीनों प्रोजेक्टों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
खरीदारों पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त बोझ अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट के कार्यकारी निदेशक संतोष अग्रवाल ने बताया कि कंपनी इन परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए करीब 750 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगी। इन प्रोजेक्टों से लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है।

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को भी निर्देश दिया है कि वह बकाया की वसूली समाधान योजना के मुताबिक ही करे। अल्फा कॉर्प बकाया धनराशि का भुगतान 24 महीनों के भीतर करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में खरीदारों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
इस फैसले से उन हजारों परिवारों ने राहत की सांस ली है जो अपनी गाढ़ी कमाई फंसी होने के कारण परेशान थे। अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट का लक्ष्य है कि वह जल्द से जल्द इन प्रोजेक्टों पर काम शुरू कर इन्हें पूरा करे ताकि खरीदारों को उनकी संपत्ति मिल सके।


