ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान: जमीनी हकीकत या सिर्फ एक ‘दिखावा’?

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अर्बन विभाग ने एक बार फिर ‘अतिक्रमण हटाओ’ का झंडा बुलंद किया। टेकजोन-IV स्थित आम्रपाली लेजर पार्क के सामने मुख्य सड़कों पर सघन अभियान चलाकर रेहड़ी-पटरी और अवैध खोखों को हटाने का दावा किया गया। प्राधिकरण ने बड़ी तत्परता से जब्त सामान की तस्वीरें जारी कर अपनी पीठ थपथपाई। लेकिन, क्या वाकई यह कार्रवाई शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, या फिर यह महज एक ‘दिखावा’ है जो हर महीने दोहराया जाता है?

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तस्वीरों का सच और सिस्टम का खेल

प्राधिकरण द्वारा जारी तस्वीरों को गौर से देखें, तो पता चलता है कि निशाने पर मुख्य रूप से भीषण गर्मी में पानी बेचने वाले छोटे स्टॉल थे। सवाल यह उठता है कि क्या शहर की मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित करने वाले सिर्फ यही गरीब वेंडर्स हैं? जानकारों का कहना है कि यह महज इत्तेफाक नहीं है। जब-जब प्राधिकरण के अर्बन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं या उच्च अधिकारियों का दबाव बनता है, तब अर्बन विभाग के कर्मचारी किसी सुरक्षित स्थान से इन छोटे दुकानदारों को उठाकर अपनी ‘सत्यनिष्ठा’ का प्रमाण दे देते हैं।

‘मासिक शुल्क’ का पुराना खेल

स्थानीय निवासियों और वेंडरों के बीच यह बात किसी से छुपी नहीं है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ईस्ट में बिना किसी स्पष्ट वेंडिंग जोन पॉलिसी के ये ठेले कैसे सड़कों पर काबिज हो जाते हैं। आरोप है कि इसके पीछे प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों का ‘मासिक शुल्क’ का सिस्टम काम करता है। यही कारण है कि कार्रवाई के नाम पर सामान जब्त तो किया जाता है, लेकिन चंद दिनों बाद वही ठेले वापस अपनी जगह पर होते हैं।दिलचस्प बात यह है कि जब भी इस भ्रष्टाचार को लेकर शोर मचता है, तो एक-दो प्रबंधकों के तबादले कर दिए जाते हैं, लेकिन थोड़े समय बाद वही अधिकारी फिर से उसी विभाग की कमान संभाल लेते हैं।

वेंडिंग जोन पॉलिसी – जानबूझकर अटकाया गया प्रोजेक्ट?

ग्रेटर नोएडा के सुनियोजित शहर होने का दावा किया जाता है, लेकिन बीते एक साल से ‘वेंडिंग जोन पॉलिसी’ फाइलों में दम तोड़ रही है। बताया जाता है कि इस पॉलिसी को बेहद चतुराई से प्राधिकरण के प्रबंधक स्तर पर बार-बार अटकाया जाता है। इसके पीछे का कथित कारण ‘ऊपर की मोटी कमाई’ है, जो अर्बन विभाग को हर महीने करोड़ों रुपये का राजस्व (अवैध तरीके से) प्रदान करती है। अगर वेंडिंग जोन बन गए, तो यह अवैध वसूली का धंधा बंद हो जाएगा, जो शायद किसी को मंजूर नहीं है।

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प्रश्न यह है कि

  • आखिर कब तक ग्रेटर नोएडा का आम नागरिक और रेहड़ी-पटरी वाले इस ‘दिखावटी कार्रवाई’ के शिकार होते रहेंगे?
  • अगर अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा?
  • वेंडिंग जोन के लिए सालों से चल रही कवायद धरातल पर क्यों नहीं उतर रही?
  • क्या प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारी इस ‘फोटो-ऑप’ (Photo-op) अभियान के पीछे छिपे भ्रष्टाचार से अनजान हैं?

क्या है समाधान ?

किसी भी शहर में अतिक्रमण को व्यवस्थित न होने देना प्राधिकरण या नगर निगम का कार्य है इसके लिए कुछ जनसुझाव नीचे दिए गए हैं

  1. साक्ष्य‑आधारित निगरानी – नगर नियोजन, ट्रैफ़िक इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों के साथ स्थानीय पत्रकार, समाजसेवियों को मिलाकर एक स्वतंत्र “ऑडिट‑टीम” स्थापित करनी चाहिए, जो प्रत्येक “हटाए गए” अतिक्रमण की सत्यता को फील्ड में जाँचे।
  2. वेंडिंग जोन नीति का शीघ्र निर्माण – नीति‑ड्राफ्ट तैयार करने के साथ ही सार्वजनिक सुनवाई, डिजिटल लाइसेंसिंग और नियमित निरीक्षण प्रणाली लागू करनी होगी।
  3. ब्यूरोक्रेटिक उत्तरदायित्व – ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अर्बन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधकों के चयन‑प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से पारदर्शी बनाना, तथा उनके कार्य‑काल को सीमित करके “रोटेशन‑शेड्यूल” को रोकना आवश्यक है।
  4. आर्थिक पारदर्शिता – अर्बन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर उत्पन्न राजस्व की वार्षिक रिपोर्ट को RTI के तहत खोलना, और उसे सिटी‑बजट में स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को यह समझना होगा कि ‘दिखावा’ करने से शहर व्यवस्थित नहीं होगा। जब तक स्पष्ट नीति नहीं बनेगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यह अतिक्रमण हटाओ अभियान सिर्फ एक ड्रामा बनकर रह जाएगा। शहर को जरूरत है एक ऐसी व्यवस्था की, जहाँ गरीब का रोजगार भी सुरक्षित रहे और सड़कों पर आमजन का चलना भी सुगम हो।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे