पश्चिम बंगाल में 4 में को पश्चिम बंगाल में परिणाम 15 साल से काबिज ममता बनर्जी के पक्ष में ना आने के बाद से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। बीते तीन दिनों में बीजेपी के चार कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है जिसमें सबसे बड़ी हत्या शुभेंदु के पी ए की बुधवार रात को हुई। देखा जाए तो बंगाल इस समय 15 साल के रक्तरंजित शासन के जाने की हताशा और कुंठा के चलते पार्टी के बिखर जाने के डर के कारण ममता बनर्जी के सिंडिकेट के प्रकोप का शिकार हो रहा है । बीते 15 वर्षों में ममता बनर्जी जिस सिंडिकेट के सहारे कट मनी से लेकर ओला बड़ी तक के काम कर रही थी जिसके विरुद्ध वो वामदलों की 30 वर्षों की साकार का विरोध करके आई थी, उसका अंत नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने के साथ ही तय हो जाएगा । ऐसे में सिंडिकेट अपने अस्तित्व व को बचाने के लिए नई सरकार को बड़ी चुनौती देने में लगा हुआ है जिससे नई सरकार पूर्ववर्ती सरकारों की तरह सिंडिकेट के सामने सरेंडर कर दे या फिर फिर से एक नया समझौता हो जाए ।
पूंजीवादी कहीं जाने वाली भाजपा के साथ से सिंडिकेट को आत्मसात करना मुश्किल है सिंडिकेट की कार्य शैली आम जनता से प्रत्येक कार्य के लिए कट मानी और उगाही पर आधारित है जिसका एक हिस्सा सरकार में बैठे लोगों को जाता है। बंगाल में राजनीतिक दलों को इसी से फंडिंग होती रही है इसीलिए वहां उद्योगों के लिए मुश्किल होती रही है । भाजपा इसके उलट कार्य करती है भाजपा को उद्योगपति पार्टी फंड में सीधे फंडिंग दे देते हैं, जिससे उनके राज्यों में आम जनता से इस तरीके की उगाहिया बंद हो जाती है। यह हम उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान हरियाणा दिल्ली समेत कई राज्य में देख चुके है। ऐसे भाजपा के आने के बाद प्रदेश में नए औद्योगिक माहौल के पनपने के डर से सिंडिकेट के शह पर हो रही इस हिंसा पर भाजपा कितनी जल्दी इसको समाप्त कर पाएगी या फिर अगले दो दिन भाजपा की शह पर केंद्रीय बल पहले सिंडिकेट के तंत्र को खत्म करेंगे उसके बाद सत्ता की शपथ ली जाएगी यह जल्द ही दिखाई देना शुरू हो जाएगा।


