नोएडा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब एक नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रबुद्ध और आर्थिक रूप से संपन्न ‘पंजाबी समाज’ ने अब सत्ता और संगठन में अपनी उचित हिस्सेदारी की मांग बुलंद कर दी है। पंजाबी विकास मंच के डिप्टी चेयरमैन संजीव पुरी ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि पंजाबी समाज अब किसी भी राजनीतिक दल का ‘बंधुआ मजदूर’ नहीं रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले चुनावों में समाज उसी पार्टी को समर्थन देगा जो उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान देगी।
इतिहास और विकास में पंजाबियों का बड़ा योगदान
संजीव पुरी ने समाज की गौरवशाली विरासत को याद दिलाते हुए कहा कि पंजाबी समाज हमेशा से जागरूक रहा है। देश की आजादी में लाला लाजपत राय, शहीद भगत सिंह, सुखदेव, उधम सिंह और करतार सिंह सराभा जैसे क्रांतिकारियों ने लहू बहाया है। उन्होंने सैन्य योगदान का जिक्र करते हुए कहा, “1971 के युद्ध में पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा हों या कारगिल युद्ध में शहादत देने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा, सौरभ कालिया और विजयंत थापर जैसे 100 से अधिक पंजाबी वीर, इस समाज ने हमेशा देश को सर्वोपरि रखा है।”
खेल जगत में मिल्खा सिंह, कपिल देव,अभिनव बिन्द्रा, बलबीर सिंह सीनियर, विराट कोहली,युवराज सिंह,और परगट सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भारत का नाम हमेशा रोशन किया। इंडस्ट्री में कुलदीप सिंह ढींगरा (बर्जर ग्रुप) सुनील मित्तल (एयरटेल) बृजमोहन लाल मुंजाल ( हीरो ग्रुप), मोहन सिंह ओबेरॉय (ओबेरॉय ग्रुप) और विवेक चन्द्र सहगल (मदरसन ग्रुप) जैसे कई इंडस्ट्रियलिस्ट है फिल्म इंडस्ट्री में केएल सहगल, पृथ्वीराज कपूर, देव आनंद, सुनील दत्त, दिलीप कुमार, राजकुमार, बलराज साहनी, प्राण, धर्मेन्द्र राजेश खन्ना, यश चोपड़ा, रणबीर कपूर,अक्षय कुमार और नरेन्द्र चंचल व गुरदासमान को कभी भूल नहीं सकते हर जगह पंजाबी छाए हुए हैं। राजनैतिक क्षेत्र में भी पंजाबियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा जैसे गुलजारी लाल नन्दा, मेहर चंद खन्ना, आई के गुजराल, सरदार मनमोहन सिंह, ज्ञानी जैल सिंह, बूटा सिंह, एचकेएल भगत, मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा, अरुन जेटली, सुषमा स्वराज, शिला दीक्षित, अंबिका सोनी, सुरेश चन्द खन्ना, सतीश महाना जिनको अनदेखा नहीं किया जा सकता। पुरी ने कहा कि यह समाज भारत सरकार को भारी राजस्व देता है, लेकिन बदले में राजनीति में वह स्थान नहीं मिलता जिसका वह हकदार है।
भाजपा से नाराजगी और प्रतिनिधित्व का सवाल
राजनीतिक समीकरणों पर बात करते हुए संजीव पुरी ने कहा कि आजादी के बाद पंजाबी समाज लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहा, लेकिन जब से इस समाज ने भाजपा का दामन थामा, भाजपा लगातार सत्ता में आ रही है। हालांकि, अब समाज को लगता है कि भाजपा उनकी कदर नहीं कर रही है। उन्होंने कुछ प्रमुख उदाहरण देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की:

मदनलाल खुराना: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जिन्हें गलत तरीके से पद से हटाया गया।
मनोहर लाल खट्टर: हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से हालिया विदाई।
उत्तर प्रदेश के दिग्गज: उत्तर प्रदेश में सुरेश कुमार खन्ना (9 बार के विधायक) और सतीश महाना (8 बार के विधायक) जैसे कद्दावर नेताओं को अब तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं दी गई।
नोएडा का मुद्दा: नोएडा में पंजाबियों की बड़ी आबादी होने के बावजूद भाजपा ने कभी किसी पंजाबी को महानगर अध्यक्ष नहीं बनाया, जबकि सपा और बसपा ने इस समाज को मौका दिया था।
संजीव पुरी ने नोएडा में पिछले दिनों हुए श्रमिक आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें औद्योगिक संपत्तियों में तोड़फोड़ हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाद में वेतन वृद्धि की, लेकिन यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था ताकि उद्योगों का नुकसान न होता। यह प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
आगामी चुनाव और समाज का संकल्प
पंजाबी विकास मंच के डिप्टी चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि अब पंजाबी समाज जागरूक हो चुका है। उन्होंने कहा, “हम आने वाले चुनावों में बहुत सोच-समझकर मतदान करेंगे। पंजाबी अब केवल उसी पार्टी को वोट देंगे जो उन्हें राजनीतिक ढांचे में जगह देगी, संगठन में जिम्मेदारी देगी और अधिक से अधिक पंजाबी उम्मीदवारों को एमएलए व एमपी के टिकट देगी।”
उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यूपी के हिंदू और सिख पंजाबी अब केवल अपने हितों और सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले दलों के साथ ही जाएंगे। इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि पंजाबी समाज कई शहरी सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।


