ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दादरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में एक बार फिर निवासियों का आक्रोश अपने मौजूदा भाजपा विधायक तेजपाल नागर के प्रति दिखाई देने लगा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भाजपा की लगातार दो सरकारों में विधायक चुने जाने के बावजूद, इस क्षेत्र में आबादी की तुलना में स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास शून्य रहा है।
15 लाख की आबादी और सुविधाओं के नाम पर केवल 30 बेड
करीब 70 से अधिक गगनचुंबी आवासीय सोसाइटियों और लगभग आठ लाख की आबादी वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। वर्तमान में इस विशाल क्षेत्र के लिए सरकारी नाम पर केवल 30 बेड का बिसरख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ही उपलब्ध है। भारतीय जन स्वास्थ्य मानकों (IPHS) के अनुसार, एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 1.20 लाख की आबादी के लिए पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में 15 लाख की आबादी पर केवल एक छोटा सीएचसी होना मानकों की खुली अवहेलना और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
10 वर्षों की ‘नाकामी’ पर सवाल
स्थानीय निवासियों ने भाजपा विधायक तेजपाल नागर पर क्षेत्र की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि विधायक पिछले 10 वर्षों में क्षेत्र में एक बड़ा सरकारी अस्पताल तक नहीं बनवा पाए हैं। निवासियों के अनुसार, मेट्रो विस्तार में हो रही देरी के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं का न मिलना विधायक की दूसरी सबसे बड़ी नाकामी है। क्षेत्र में मध्य और निम्न आय वर्ग के परिवारों की संख्या अधिक है, जो निजी अस्पतालों के महंगे इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। एक सरकारी अस्पताल होने से न केवल इलाज सस्ता मिलता, बल्कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर भी अंकुश लगता।
‘गोल्डन टाइम’ और जान का जोखिम स्वास्थ्य
सुविधाओं की कमी का सबसे गंभीर पहलू आपातकालीन स्थिति से जुड़ा है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि भाजपा नेता अक्सर जिला अस्पताल (नोएडा) और जिम्स (गलगोटिया के पास) का हवाला देते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि नोएडा वेस्ट से जिला अस्पताल पहुंचने में 35 से 40 मिनट और जिम्स अस्पताल जाने में 50 से 60 मिनट का समय लगता है।

सड़क हादसों या हार्ट अटैक जैसे मामलों में ‘गोल्डन टाइम’ (शुरुआती एक घंटा) बेहद महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल दूर होने के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है, जिससे क्षेत्रवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
नेफोवा (NEFOWA) की मांग
मेडिकल कॉलेज और अत्याधुनिक अस्पताल नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (नेफोवा) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ग्रेटर नोएडा वेस्ट आज लाखों लोगों का घर बन चुका है, लेकिन विडंबना यह है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए एक भी पूर्ण विकसित सरकारी अस्पताल उपलब्ध नहीं है। बिसरख CHC अपनी सीमित क्षमताओं के साथ केवल प्राथमिक सेवाएं दे पा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि नेफोवा लंबे समय से मांग कर रहा है कि यहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एक बड़ा सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाए। इससे न केवल किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, बल्कि भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों को भी पूरा किया जा सकेगा।
कमज़ोर है विपक्ष वर्ना चुनावों पर पड़ सकता है असर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्वास्थ्य सेवा की उपेक्षा के पीछे एक बड़ा कारण विपक्ष का न होना भी है I जानकारों के अनुसार यहाँ का अधिकांश वोटर भाजपा का माना जाता है ऐसे में विपक्षी दल ख़ास तोर पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता भी ग्रामीण समस्याओ पर ही अपना फोकस रखते हैं जिसके कारण पक्ष और विपक्ष दोनों नेता यहाँ की समस्याओ पर ध्यान नहीं देते हैI विपक्ष के हालात इतने कमज़ोर हैं कि जिम्स अस्पताल में पुलिसिया कार्यवाही के विरोध में पुरे जिले से समाजवादी पार्टी के आह्वान पर मात्र 35 लोग प्रदर्शन करने पहुँच पाते है। किन्तु जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, दादरी विधायक के लिए जनता की यह नाराजगी गले की फांस बन सकती है। स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दे पर लोगों का आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि इस बार चुनाव में ‘विकास’ के दावों पर सवालिया निशान खड़े होंगे। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष और विधायक इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और क्या चुनावों से पहले इस दिशा में कोई ठोस घोषणा की जाती है या नहीं।



