डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) द्वारा निर्मित एक फ्लाईओवर की सड़क आम जनता के लिए खुलने के महज 15 दिनों के भीतर ही उखड़ गई है। पहली बारिश के बाद ही सड़क का यह हाल हो जाने से इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिमी कॉरिडोर के ऊपर 130 मीटर लंबी सड़क पर बने इस फ्लाईओवर का उद्घाटन 23 जून को किया गया था। लेकिन महज दो सप्ताह के भीतर ही, मकोड़ा से तिलपता की तरफ जाने वाली लेन पर सड़क का एक बड़ा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क से बजरी बाहर आ चुकी है, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर आक्रोश है, उनका कहना है कि लंबे इंतजार के बाद मिली सुविधा इतनी जल्दी टूट जाना ठेकेदार और परियोजना की देखरेख करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
डीएफसीसीआईएल ने जनवरी 2020 में तिलपता गोल चक्कर से मकोड़ा गोल चक्कर के बीच यातायात को डायवर्ट कर इस फ्लाईओवर का निर्माण शुरू किया था। परियोजना को पूरा करने में कई बार देरी हुई। निर्माण शुरू होने के बाद डीएफसीसीआईएल ने 10 से अधिक बार समय सीमाएं तय कीं, लेकिन समय पर फ्लाईओवर का निर्माण पूरा नहीं हो सका था। लंबे इंतजार और कई डेडलाइन्स मिस होने के बाद, आखिरकार 23 जून को इस फ्लाईओवर को आम जनता के लिए खोला गया था।
उद्घाटन के महज 15 दिनों के भीतर ही सड़क का इस तरह उखड़ जाना, विशेषकर पहली बारिश के बाद, निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता और परियोजना के गुणवत्ता नियंत्रण पर सीधे सवाल खड़े करता है। यह न केवल लाखों रुपये के सार्वजनिक धन की बर्बादी का मामला है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है।

इस मामले पर अभी तक डीएफसीसीआईएल या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।



