नोएडा में तीन दिनों तक हुई बरसात ने नोएडा प्राधिकरण में फैली अवस्थाओं की पोल खोल दी। विशेष तौर पर वर्क सर्किल एक से लेकर पांच तक जिसमें पुराना शहर बसा है हालात दयनीय हो गए । सेक्टर 62, 63 में तो बाकायदा उधमी अधिकारियों को ढूंढ रहे है, नोएडा ARTO दफ्तर कैंपस में भी दरिया जैसा नजारा दिखा। क्या नोएडा के इस क्षेत्र से सम्बंधित अधिकारी स्वच्छता पुरूस्कार पाने के प्रयासों में लगे रहे और मानसून से पहले नालों की सफाई सिर्फ कागजों में हुई? आखिर हर साल बारिश आते ही यही हाल क्यों?
उधर अधिकारी अपनी एनर्जी समस्याओ पर काम करवाने की जगह ऐसे वीडियो, खबरों को हटवाने में लगा रहे है। उसके लिए बकायादा “तेरा गम अगर न होता तो शराब मैं न पीता” की तर्ज पर मासिक भत्ता पाने वालो से सोशल मीडिया पर काउंटर तैयार करवाए जा रहे हैं कि दिल्ली गुरूग्राम के मुकाबले नोएडा में बहुत कम पानी भरा है वो तो खोडा के चलते ऐसा हुआ नहीं तो यहाँ तो सफाई, सड़क और सीवर सब चंगा था। पर नोएडा के (जल, सिविल) अधिकारियो का समय अभी वाकई ख़राब है उनके काउंटर के घंटे भर बाद ही सोशल मीडिया पर ही कई वरिष्ठ पत्रकार ने लिख दिया कि दिल्ली में पानी एकदम चला गया नोएडा गुरुग्राम में हालत दयनीय है।
किसी ने नोएडा प्राधिकरण को लिखा है
बात ये नहीं है कि कद हमारा घट गया,
सब तरफ पानी देख कर हम खुद सिकुड़ गए ।
इधर सड़क, फैक्ट्री और घरो में पानी भरने से लोग परेशान हुए तो फिर समाजसेवी कहां चुप बैठने वाले हैं आखिर उन्हें भी अपनी बात रखने का सही समय मिला है तो समाज सेवियों ने भी प्राधिकरण से इस पूरे प्रकरण पर ऑडिट की मांग कर डाली तो कई समाजसेवी महंगी गाड़ियों में बैठकर घूम-घूम कर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपनी इमेज चमकाते भी दिखे वो अलग बात है कि उनका मुद्दा सफाई से अधिक नेतागिरी पर है।
लेकिन सौ बात की एक बात कि जितनी एनर्जी इस समय नोएडा के अधिकारी इन आवाजों को दबाने की कोशिश में वेस्ट कर रहे हैं उतनी उसकी 30% भी अगर समय से सफाई करवाने में लगा दिए होते तो यह नहीं होता । वहीं एक अधिकारी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री जी के गोरखपुरिया आशीर्वाद से प्रकाशित अधिकारी सही दिशा में काम करे तो नोएडा में कागजी स्वच्छता सम्मान की जगह नोएडा की जनता का सम्मान प्राधिकरण को मिल जाएगा और बारिश में ऐसे दिन न देखेने पड़ेंगे पर उसके लिए कार्य करना पड़ेगा खोडा का बहाना अब पुराना हो गया है तो एक अन्य ने कहा काम सही करना है तो गोरखपुरिया आशीर्वाद से प्रकाशित अधिकारी बदल कर देख लो।




