बेलाग लपेट : यूपी विधानसभा चुनाव 2027- योगी आदित्यनाथ हैं बीजेपी के वो ‘ब्रह्मास्त्र’, जिसकी काट विपक्ष के पास नहीं

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटियां फिट करने में लगे हैं, लेकिन इस सियासी समर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ है, जिसकी काट फिलहाल किसी भी विपक्षी दल के पास नजर नहीं आ रही है। यह ब्रह्मास्त्र कोई और नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं।

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2027 के चुनावों में बीजेपी की प्रचंड ताकत का सबसे बड़ा चेहरा योगी आदित्यनाथ ही रहने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषक हरीशंकर शाही का मानना है कि योगी आदित्यनाथ आज की तारीख में उस कोर हिंदू वोट बैंक के ‘मेगा-स्टार’ बन चुके हैं, जिनकी पहली प्राथमिकता हिंदू धर्म, संस्कृति और अपनी पहचान है।

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हिंदू अस्मिता और योगी का अटूट रिश्ता

उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसे तो जातिगत समीकरण हमेशा हावी रहते हैं, लेकिन जब बात योगी आदित्यनाथ की आती है, तो हिंदू वोट बैंक के सामने जाति का सवाल बौना हो जाता है। यह वो वोट बैंक है जो आज की तारीख में बिना किसी झिझक के, आंख में आंख डालकर यह कहना चाहता है—”मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।”

यह वर्ग बीजेपी से कभी कभार नाराज हो सकता है, लेकिन वह योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कहीं नहीं जा सकता। राजनीतिक हलकों में यह एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है कि यह वोटर भले ही बीजेपी का साथ एक पल के लिए छोड़ दे, लेकिन योगी आदित्यनाथ का साथ नहीं छोड़ेगा।

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राष्ट्रवादी और भय-मुक्त शासन के समर्थकों का गणित

योगी आदित्यनाथ की ताकत को कुछ आंकड़ों और मनोवैज्ञानिक पहलुओं से समझा जा सकता है:

राष्ट्रवाद समर्थक (90% योगी के साथ): राष्ट्रवाद की विचारधारा रखने वाले मतदाताओं में से लगभग 90 फीसदी का वोट सीधे योगी के खाते में जाता है। इनमें से 10 फीसदी मतदाता ऐसे हो सकते हैं जो तात्कालिक मुद्दों (जैसे नीट परीक्षा या आरक्षण विवाद) के कारण चुनावी उदासीनता दिखाएं या घर बैठ जाएं, लेकिन अगर वे पोलिंग बूथ तक गए, तो उनका वोट सिर्फ और सिर्फ योगी को ही जाएगा।

भय-मुक्त शासन समर्थक (60% मजबूत वोट): कानून-व्यवस्था और ‘एंटी-गुंडा’ शासन पसंद करने वाले 60 फीसदी मतदाता योगी के साथ मजबूती से खड़े हैं। बाकी के 40 फीसदी वो लोग हैं जो शासन से तो खुश हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अपनी जाति का थानेदार न होने या अन्य स्थानीय मुद्दों के कारण थोड़ा छिटक सकते हैं। 10 साल की सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) के कारण यह घिसावट स्वाभाविक है, लेकिन यह ‘स्विंग वोट’ है, जो चुनाव के आखिरी क्षणों में बहुत तेजी से सुरक्षा और स्थिरता के नाम पर योगी के पक्ष में लामबंद हो जाता है।

जातिगत राजनीति की दीवारें ढहने का संकेत

इस चुनाव में सबसे दिलचस्प बात यह है कि योगी के ‘सुरक्षा मॉडल’ के आगे विपक्ष का जातिगत कार्ड कमजोर पड़ता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी का कोर वोटर माना जाने वाला अहीर (यादव) समाज भी उन इलाकों में, जहां मुस्लिम आबादी का वर्चस्व और डर है, सपा को वोट देने से कतरा रहा है। सुरक्षा की गारंटी के लिए वे भी योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर भरोसा करना बेहतर समझ रहे हैं।

इस बार बीजेपी नहीं कर रही कोई चूक: मुफ्त योजनाओं की काट तैयार

2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और राहुल गांधी की ‘खटाखट योजना’ (एक लाख रुपये सालाना) को बीजेपी ने हल्के में लिया था, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। लेकिन 2027 के लिए बीजेपी ने अपनी रणनीति बदल ली है। इस बार जैसे ही समाजवादी पार्टी महिलाओं या गरीबों को 40 हजार रुपये बांटने की घोषणा कर रही है, योगी सरकार तुरंत 50 हजार रुपये की योजनाओं का कार्ड खेल दे रही है। इस आक्रामक चुनावी प्रबंधन ने विपक्ष के ‘फ्रीबीज’ (Freebies) वाले दांव को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है।

विपक्ष की गलतियां और खुद का नुकसान

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत यह भी है कि विपक्ष अपनी हरकतों से उनके वोट बैंक को और अधिक मजबूत कर रहा है। हाल ही में लखनऊ में पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता करने वाले आरोपियों के साथ जिस तरह समाजवादी पार्टी खड़ी दिखाई दी, उसने जनता के बीच एक नकारात्मक संदेश दिया है। लोगों के मन में यह डर बैठ रहा है कि अगर सपा सत्ता में आई, तो फिर से वही पुराना ‘गुंडाराज’ लौट आएगा।

वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस की स्थिति राज्य में बैताल जैसी है जो सिर्फ सपा की पीठ पर लटककर अपनी प्रासंगिकता तलाश रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह इस निर्णायक स्विंग वोट को अपनी तरफ खींचने की स्थिति में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।

असली लड़ाई: 202 की नहीं, 275 पार की है

बीजेपी के लिए 2027 में सिर्फ सरकार बनाना यानी 202 सीटों का बहुमत हासिल करना कोई बड़ी चुनौती नहीं है। योगी आदित्यनाथ का कद और उनकी लोकप्रियता का पैमाना अब 275 सीटों के बाद शुरू होता है। असली लड़ाई इस बात की है कि योगी आदित्यनाथ इस बार प्रचंड बहुमत के साथ 275 के आंकड़े को कितना पार ले जा सकते हैं।

ऐसे में फिलहाल, उत्तर प्रदेश की चुनावी जमीन पर योगी आदित्यनाथ एक अपराजेय योद्धा की तरह खड़े हैं, जिनकी घेराबंदी कर पाना विपक्ष के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

(अगले विश्लेषण में हम विपक्षी दलों की ताकत और उनकी रणनीतियों की समीक्षा करेंगे।)

upvidhansabha 2027 samajwadiparty
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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे