एनसीआर खबर एक्सक्लूसिव : नोएडा प्राधिकरण के दो अधिकारी‑कर्मचारी समेत तीन लोगों को किसने जांच के लिए उठाया, जानिये सोमवार को शहर में मचे हड़कंप की रहस्यपूर्ण कहानी, कौन कर गया समाचारों में खेल?

आशु भटनागर
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आशु भटनागर। सोमवार को नोएडा प्राधिकरण में तैनात दो अधिकारी-कर्मचारियों समेत तीन लोगों को पूछताछ के लिए उठाए जाने के समाचार ने पूरे नोएडा में हड़कंप मचा दिया। शुरुआत में नोएडा प्राधिकरण के सूत्रों से यह खबर आने लगी कि इनकम टैक्स की विजिलेंस टीम ने सभी को उनके घरों से उठाया है तो कई अफवाहों में बीते दिनों इसी क्षेत्र में एक मॉल पर हुई कार्यवाही का परिणाम भी कहा गया है किंतु देर रात स्पष्ट हुआ कि असल में ये अधिकारी महर्षि भूमि घोटाला प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम द्वारा उठाए गए थे। हालांकि रोचक तथ्य ये भी है कि ईडी या इनकम टैक्स दोनों में से किसी ने भी अब तक हिरासत और गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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आपको बता दें कि सलारपुर खादर के खसरा संख्या 700 से 711, 723, 724, 728 से 735, 745 से 752, 759, 760, 762 से 764, 779, 780 और 795 से 798 समेत कई खसरे जांच के दायरे में हैं। वहीं, भंगेल बेगमपुर के खसरा संख्या 176, 178, 217, 221, 223, 225, 226, 247, 250 और 251 को प्राधिकरण ने चिह्नित किया है, जिन पर अवैध फ्लैट बन रहे थे, जिन्हें प्राधिकरण द्वारा रुकवाया गया था।

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उठाए गए तीनों लोग कौन हैं?

जानकारी के अनुसार, इनमें से एक अधिकारी महाप्रबंधक का पर्सनल स्टाफ (पीएस) है, जबकि दूसरा वर्क सर्किल दस का सुपरवाइजर है, जो पहले वर्क सर्किल आठ में तैनात रह चुका है। तीसरा व्यक्ति उन एजेंसियों का लाइजनर बताया जा रहा है जो प्राधिकरण की जमीन पर निर्माण कार्य कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, ये लोग महर्षि भूमि घोटाला प्रकरण में जिन 34 एजेंसियों को 45 खसरा नंबरों की जमीन बेची गई है, उन्हें निर्माण कार्य में संरक्षण देने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सुविधा शुल्क के रूप में नकद राशि लेने और दिलाने का काम कर रहे थे। जांच टीम को इन एजेंसियों से भारी मात्रा में कैश फ्लो की जानकारी मिली, जिसके आधार पर रविवार को टीम इन लोगों तक पहुंची।

एनसीआर खबर को मिली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी उन जमीन खरीदने वाली एजेंसियों पर शिकंजा कस रही थी, जिनके कई प्राइवेट मल्टीपल लॉकर दिल्ली में मिले हैं। इन लॉकरों में भारी मात्रा में कैश और दस्तावेज मौजूद थे। बताया जा रहा है कि इन लॉकरों में सामान रखने और निकालने की प्रक्रिया बेहद जल्दी-जल्दी की गई थी, जिससे इन लोगों के लॉकरों की पुष्टि हुई है।

सूत्रों का दावा है कि आरोपियों को उठाने शुरुआत बिसरख से हुई, बिसरख थाना क्षेत्र स्थित ऐमनाबाद गांव से गौशाला के पास वर्क सर्किल दस के सुपरवाइजर को उठाने का प्रयास केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने किया, तो ग्रामीणों के साथ बहस होने लगी। सूचना पर पहुंची बिसरख पुलिस ने जांच टीम से बिना सूचना आने को लेकर कड़ा एतराज जताया। हालांकि, बाद में जांच एजेंसी के सख्त होने पर मामला शांत हो गया और जांच टीम को वहां से जाने दिया गया।

ईडी की कार्रवाई को किसने बताया इनकम टैक्स की कार्रवाई? प्राधिकरण की आंतरिक राजनीति पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जहां एक ओर प्राधिकरण और अवैध भू-माफियाओं की मिलीभगत पर कार्रवाई होने की जानकारी आ रही थी, वहीं दूसरी ओर चर्चा ये भी है कि प्राधिकरण के ही कुछ अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए मीडिया में यह जानकारी इनकम टैक्स की कार्रवाई प्लांट करवा दी।

जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के फंसने की संभावना है। ऐसे में कुछ अधिकारियों ने जल्द सेवानिवृत्त होने जा रहे महाप्रबंधक पर ही सारा ठीकड़ा फोड़ते हुए समाचार को अलग दिशा दे दी। देर रात जब प्राधिकरण को इससे होने वाले बड़े नुकसान का अंदेशा हुआ, तब जाकर आंतरिक राजनीति पर रोक लगाई गई और किसी तरह उठाए गए कर्मचारियों को रिहा करवाया गया।

प्राधिकरण के एक अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण पर क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि यह दुःख की बात है कि प्राधिकरण में ऐसे हालात में भी लोग एक-दूसरे की जड़ें काटने से बाज नहीं आते हैं। वहीं, एक चर्चा तो ये भी है कि जल्द ही सिविल का पूरा कार्य जांच के दायरे में आए महाप्रबंधक से लेकर समाचार की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य महाप्रबंधक को दिया जा सकता है।

ऐसे में ये माना जाना गलत नहीं होगा कि महर्षि भूमि घोटाला प्रकरण अब केवल भू-माफियाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी जांच का दायरा प्राधिकरण के भीतर तक पहुंच चुका है। ईडी की टीम द्वारा कैश फ्लो और दिल्ली में मिले लॉकरों के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की संभावना है। वहीं, जांच एजेंसी की कार्रवाई को इनकम टैक्स की कार्रवाई बताकर जानकारी को विकृत करने का मामला प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। ऐसे में यह देखा जाना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में इस जांच में कितने और नाम सामने आते हैं, क्या फिर से युवराज काण्ड पर हुई कार्यवाही की तरह एक ताकतवर महाप्रबंधक के आगे फिर कोई मासूम शिकार बन जाएगा और क्या प्राधिकरण अपनी आंतरिक सफाई में सक्षम हो पायेगा ?

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे