आशु भटनागर। बीते दिनों ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित जीएल बजाज कॉलेज (GL Bajaj) में प्रवेश प्रक्रिया और कैम्पस बदलने के आरोपों को लेकर छात्रों द्वारा उठाए गए आरोपों के बाद अब 2 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सेवा संकप का बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने के समाचार से एक बार फिर शिक्षा और राजनीती बीच गठजोड़ की चर्चाये शुरू हो गयी है। कहा जा रहा है कि ऐसे ही सिडिकेट के चलते शहर में निजी शिक्षा और निजी अस्पतालो मैं शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है।
क्या है मामला ?
24 सितंबर को जीएल बजाज कॉलेज के परिसर में लगभग 150‑200 छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका प्रवेश GL बजाज के नोएडा कैंपस में स्वीकार किया गया, पर रजिस्ट्रेशन आगे मथुरा शाखा में किया गया। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्होंने ₹1.72 लाख तक की ट्यूशन‑फ़ी, हॉस्टल फीस और अन्य शुल्क जमा कराए, पर बाद में उन्हें बताया गया कि उनका नाम मथुरा शाखा में दर्ज है। बढ़ते हंगामे के बीच कॉलेज प्रशासन ने 26 सितंबर तक मामले का समाधान करने का आश्वासन भी दिया था। किन्तु अब कल 2 अक्तूबर को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त एवं राजस्व मंत्री पंकज चौधरी की मौजूदगी में इसी कालेज में एक कार्यक्रम होने जा रहा है। बुधवार को क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नगर ने कार्यक्रम से पूर्व कॉलेज के ऑडिटोरियम का निरीक्षण किया।

ऐसे में ये ताजा समाचार उनके समाधान का नहीं कॉलेज प्रबंधन का ऐसे मामलों के बाद अपने राजनीतिक प्रभाव को दिखाने का कहा जा रहा है बड़ा प्रश्न यह है कि जिन नेताओं को कॉलेज को छात्रों के साथ किये गए धोखाधडी की समस्याओं के समक्ष समय पहुंचना चाहिए था वह इसी कॉलेज में अपने कार्यक्रम के लिए पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं इस कार्यक्रम के आयोजन के समाचार के बाद कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि यह दरअसल कॉलेज प्रबंधन का छात्रों को यह दिखाने का प्रयास है कि देखिए हमारे संबंध सरकार में कहां तक है इसलिए अगर आप आंदोलन करते हैं या शिकायत भी करते हैं तो बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। शहर के ही कई शिक्षाविदो का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों के बदले कॉलेज मालिकों को प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण मिल जाता है, जिससे वे छात्रों के हितों से समझौता करने के बाद भी बेखौफ रहते हैं।
एनसीआर खबर के 3 सवाल
- “क्या निजी शिक्षा संस्थानों में राजनैतिक शक्ति का प्रभाव छात्रों के हक़ों को बाधित कर रहा है?
- क्या राजनीतिक दल अपने कार्यक्रमों के लिए शैक्षिक परिसरों का इस्तेमाल बंद करेंगे?
- क्या शिक्षा व्यवस्था को निजी प्रबंधकों के रसूख और व्यापारिक हितों से मुक्त कराया जा सकेगा?
गौतम बुध नगर के कॉलेज में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है जीएल बजाज ही नहीं गौतम बुध नगर के अन्य बड़े कॉलेज में भाजपा के कार्यक्रमों का होना एक आम बात हो गई है, चर्चाये तो यहां तक है कि कई कॉलेज के बच्चों को सत्ता पक्ष की रैलियां तक में भेजा जाता रहा है। आरोप है कि इससे छात्रों का कोई फायदा हो या ना हो किंतु कॉलेज के मालिकों को ऐसे मामलों में संरक्षण आराम से मिल जाता है । ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय जनता पार्टी का स्थानीय संगठन अपने कार्यक्रमों के लिए कॉलेज के ऐसे प्रयोग करने की आदत को बदलेगा या फिर कॉलेज में कार्यक्रम करके यहां पढ़ने वाले जेनजी बच्चों को यह संदेश देती रहेगी कि उनके समस्याओं का अंत इस सरकार के पास नहीं है।




