नई दिल्ली: राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एक पुराने मामले में कड़ा कानूनी कदम उठाया गया। गाजियाबाद की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने अदालत की कार्रवाई में लगातार अनुपस्थित रहने के चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने उनकी संपत्ति जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। यह पूरा मामला लगभग 8 साल पुराना है, जो गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
क्या है 8 साल पुराना ‘थप्पड़ कांड’?
वर्ष 2018 में चंद्रशेखर आजाद साहिबाबाद क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। आरोप है कि उस दौरान उनके समर्थक हथियार लेकर पहुंचे थे। समारोह में मौजूद धर्मेंद्र कुमार नाम के एक व्यक्ति ने आपत्ति जताते हुए सवाल किया था कि इतने हथियारों की क्या आवश्यकता है?

शिकायत के मुताबिक, इस सवाल से नाराज होकर चंद्रशेखर आजाद और उनके करीब 15 साथियों ने धर्मेंद्र कुमार के साथ कथित तौर पर गाली-गलौच, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी थी। इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (मारपीट) और 305 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
कोर्ट में पेश न होने पर हुई कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद अदालत के समक्ष पेश नहीं हो रहे थे, जिसके चलते उन्हें फरार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार के वकील ने अदालत में दलील दी कि सांसद के खिलाफ पहले भी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सुनवाई से लगातार नदारद रहे हैं। वकील ने सीआरपीसी (CrPC) की धारा 82 (फरार व्यक्ति की उद्घोषणा) और धारा 83 (संपत्ति की कुर्की) के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आरोपी सांसद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का निर्देश दिया है।




