नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में विमानन क्षेत्र के बुनियादी ढाचे को और मजबूत करने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने देश के 11 हवाई अड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर ली है। इन सभी एयरपोर्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 50 साल की लंबी अवधि के लिए लीज़ पर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के इस साल दिसंबर तक शुरू होने की संभावना है। सरकार का यह कदम देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में विमानन सेवाओं के विस्तार और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
इस बार की निजीकरण प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए बड़े और छोटे हवाई अड्डों को आपस में जोड़ा गया है। इसके तहत कुल 5 बंडल तैयार किए गए हैं। हर बंडल के संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी जाएगी।
तैयार किए गए 5 प्रस्ताविक बंडल इस प्रकार हैं:
अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल
वाराणसी, गया और कुशीनगर
भुवनेश्वर और हुबली
रायपुर और औरंगाबाद
तिरुचिरापल्ली और तिरुपति
इन सभी 11 एयरपोर्ट्स पर निजी कंपनियों के आने से हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास, बेहतर रखरखाव और उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं, और दिसंबर तक इसके लिए आधिकारिक तौर पर बोलियां (Bidding Process) आमंत्रित की जा सकती हैं।



