नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर आज (27 अक्टूबर 2026) सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें चुनाव आयोग के रुख, विपक्षी दलों की मांगों और अदालत की टिप्पणियों पर सबका ध्यान केंद्रित रहा।
चुनाव आयोग का पक्ष सुनवाई से ठीक पहले निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया। आयोग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों और कांग्रेस द्वारा SIR को लेकर उठाए गए सवाल पूरी तरह से मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित और तथ्यों से परे हैं। आयोग ने यह भी जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग के सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं, और इसमें कोई भी फैसला एकतरफा नहीं था।
विपक्ष की प्रमुख मांगें
दूसरी ओर, I.N.D.I.A. गठबंधन के नेताओं और 12 विपक्षी पार्टियों की तरफ से संयुक्त याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने (voter deletions) का एक स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके अलावा, विपक्षी दलों ने बूथ-वार हटाए गए मतदाताओं की सूची उचित कारणों के साथ सार्वजनिक करने और फॉर्म-6 से जुड़े नियमों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने की भी मांग उठाई है।
अदालत की टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कुछ अहम टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा कि देश में कुछ लोग अनधिकृत रूप से रह रहे हो सकते हैं, जो अपनी पहचान उजागर होने के डर से सामने नहीं आते। इसके साथ ही, न्यायालय ने यह भी साफ शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं लिया जा सकता।
महाराष्ट्र से जुड़ी याचिका पर अगली सुनवाई 5 नवंबर को सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया और वहां मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर भी विचार किया गया। इस विशेष मामले पर अब अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को होगी।
स्थानीय नागरिकों और मतदाताओं के लिहाज से यह मामला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव आगामी चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता पर पड़ेगा। कोर्ट के आगामी आदेशों पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।



