गौतमबुद्धनगर: अंसल हाईटेक टाउनशिप के निदेशक गिरफ्तार, 77 करोड़ से अधिक की वसूली के मामले में 15 दिन की न्यायिक हिरासत

superadminncrkhabar
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गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने भू-राजस्व बकाया और रेरा (RERA) के वसूली प्रमाण-पत्रों (RC) के निस्तारण हेतु चलाए जा रहे अपने सख्त अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। दादरी तहसील क्षेत्र में स्थित मैसर्स अंसल हाईटेक टाउनशिप्स लिमिटेड/उत्तम स्टील्स एसोसिएट्स लिमिटेड के निदेशक को विभाग द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर 77 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया होने का आरोप है।

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क्या है पूरा मामला?

उप जिलाधिकारी (SDM) दादरी के अनुसार, रेरा द्वारा जारी वसूली प्रमाण-पत्र के सापेक्ष उक्त फर्म पर कुल 77,66,80,434 रुपये (लगभग 77.66 करोड़ रुपये) और उस पर देय ब्याज की धनराशि भू-राजस्व के रूप में लंबित थी। जिला प्रशासन द्वारा बार-बार मांग-पत्र जारी करने और समय देने के बावजूद बिल्डर फर्म की ओर से न तो बकाया राशि जमा की गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 171 के तहत अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रशासन ने निदेशक बंटी (पुत्र प्रहलाद) के विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट (आरसी प्रपत्र-37) जारी किया। 30 अक्टूबर 2026 को पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर उपजिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया।

प्रशासन द्वारा बकायेदार को सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया, जिसमें उनसे बकाया भुगतान करने या कोई ठोस प्रतिभूति (Security) प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। हालांकि, निदेशक द्वारा कोई भी भुगतान या प्रतिभूति उपलब्ध न करा पाने के बाद, उन्हें तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए जिला कारागार, गौतमबुद्धनगर भेजने का आदेश दिया गया। अधीक्षक, जिला कारागार को इस संबंध में नियमानुसार आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से एक कड़ा संदेश दिया है कि राजस्व वसूली के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी बकायेदारों को उनके बकाया भुगतान के लिए उचित अवसर दिए जा रहे हैं, लेकिन यदि इसके बाद भी धनराशि जमा नहीं की जाती है, तो कुर्की, नीलामी और गिरफ्तारी जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

तहसील दादरी प्रशासन ने अन्य सभी बकायेदारों से अपील की है कि वे अपने विरुद्ध लंबित वसूली प्रमाण-पत्रों का प्राथमिकता के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाइयों से बचा जा सके।

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