ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) ने सोमवार को अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सुथ्याना गांव में भारी अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में लगभग 9,500 वर्ग मीटर अधिग्रहित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार के कड़े निर्देशों के अनुपालन में की गई।
प्राधिकरण के महाप्रबंधक ए.के. सिंह के अनुसार, सुथ्याना के खसरा संख्या 798, 810, 815, 816 और 817 की जमीन प्राधिकरण द्वारा पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी थी और इसका कब्जा भी प्राप्त कर लिया गया था। इसके बावजूद, कुछ भू-माफिया और कॉलोनाइजर इस जमीन पर अवैध रूप से पक्के निर्माण कर एक अनधिकृत कॉलोनी बसाने का प्रयास कर रहे थे।
ध्वस्तीकरण अभियान का नेतृत्व परियोजना विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक राजेश निम ने किया। इस टीम में प्रबंधक स्वतंत्र वर्मा और वर्क सर्किल 4 के अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे। टीम ने बुल्डोजर की सहायता से अवैध रूप से निर्मित दीवारों और संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया।
अधिकारियों की चेतावनी और अपील
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सुमित यादव ने इस कार्रवाई पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भू-माफियाओं के झांसे में आकर लोग अपनी मेहनत की कमाई अनधिकृत संपत्तियों में न लगाएं।
एसीईओ ने सुझाव दिया, “ग्रेटर नोएडा में किसी भी प्रकार की जमीन या संपत्ति खरीदने से पहले खरीदारों को प्राधिकरण के कार्यालय से संपर्क कर जमीन की वैधानिकता की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए। अवैध कॉलोनियों में निवेश करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि इसमें वित्तीय जोखिम भी अत्यधिक है।”
प्राधिकरण के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिसूचित क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम लगातार उन क्षेत्रों की निगरानी कर रही है जहाँ अवैध निर्माण की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उन कॉलोनाइजरों को कड़ा संदेश दिया है जो सरकारी नियमों की अनदेखी कर सार्वजनिक और अधिग्रहित भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।



