उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के दिल्ली स्थित आवास पर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी चुनाव की रणनीति और समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ संभावित सीट-बंटवारे के समीकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई।
दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा उन चुनिंदा विधानसभा सीटों की पहचान करना था, जहां पार्टी की जीत की संभावना सबसे प्रबल है। कांग्रेस हाईकमान का रुख स्पष्ट है कि इस बार केवल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाए, जहां पार्टी का जमीनी संगठन मजबूत है और जिताऊ उम्मीदवार उपलब्ध हैं। प्रियंका गांधी ने पूर्व में भी पार्टी के भीतर इसी रणनीति पर जोर दिया था।
वर्ष 2027 के चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाएं अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही हैं। बैठक के दौरान इस बात पर भी मंथन हुआ कि सीट बंटवारे का क्या फॉर्मूला होना चाहिए, जिससे दोनों दलों के बीच आपसी तालमेल बेहतर बना रहे और विपक्षी गठबंधन को अधिकतम लाभ मिल सके। हालांकि, कांग्रेस इस बार सम्मानजनक और मजबूत सीटों पर अपनी दावेदारी पुख्ता करने की तैयारी में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा का उत्तर प्रदेश के मामलों में इस तरह सीधे सक्रिय रहना यह संकेत देता है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। उत्तर प्रदेश में संगठन को पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय दल के साथ चुनावी तालमेल बिठाने की यह कवायद कांग्रेस के लिए आगामी चुनावों में बेहद अहम साबित हो सकती है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर आधिकारिक सहमति किस रूप में सामने आती है।



