नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और ‘फॉर्म-6’ (Form-6) के प्रयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण और राहत भरा स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी पुराने मतदाता का नाम SIR (विशेष पुनरीक्षण) की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो वे बिना किसी कानूनी डर के ‘फॉर्म-6’ भरकर दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस निर्णय से उन मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनके नाम तकनीकी या अन्य कारणों से ड्राफ्ट सूची से गायब हो गए थे। आइए जानते हैं इस निर्देश से जुड़े 10 मुख्य बिंदु:
- पुराने मतदाताओं को बड़ी राहत: SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न होने की स्थिति में पुराने मतदाता भी ‘फॉर्म-6’ भरकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इससे उन पर झूठी घोषणा का मामला दर्ज नहीं होगा।
- नए सिरे से पंजीकरण अनिवार्य: यदि किसी पंजीकृत मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो उन्हें अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए ‘फॉर्म-6’ के माध्यम से दोबारा आवेदन करना होगा।
- पहले से पंजीकृत होना बाधा नहीं: पूर्व में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद, ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने पर ‘फॉर्म-6’ जमा किया जा सकता है।
- गलत घोषणा की श्रेणी में नहीं: केवल इस आधार पर कि आवेदक पहले से मतदाता रहा है, ‘फॉर्म-6’ भरना झूठी या गलत घोषणा नहीं माना जाएगा।
- धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं: निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को निर्देश दिए गए हैं कि सिर्फ पुराने मतदाता होने और दोबारा फॉर्म-6 जमा करने के आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- दोहरी प्रविष्टि (Duplicate Entry) पर रोक: यह राहत केवल तभी प्रभावी होगी जब आवेदक किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत न हो।
- कानूनी रूप से सही हो घोषणा: ‘फॉर्म-6’ में आवेदक द्वारा दी जाने वाली घोषणा अन्य सभी कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।
- दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का हवाला: आयोग ने ‘निलोतपल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य’ मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर के आदेश का हवाला देते हुए यह स्थिति स्पष्ट की है।
- आशंकाओं का समाधान: अदालत और आयोग के इस रुख से उन मतदाताओं की आशंकाएं दूर हो गई हैं, जो दोबारा फॉर्म भरने पर कानूनी पचड़े में फंसने से डर रहे थे।
- व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश: ECI ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिए हैं कि वे इस स्पष्टीकरण का स्थानीय भाषाओं में मीडिया के विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों तक यह जानकारी पहुंच सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने और पात्र मतदाताओं को बिना किसी भय के अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर प्रदान करने की दिशा में एक अहम पहल है।


