वडोदरा: भारतीय मजदूर संघ (BMS) देश के करोड़ों कर्मचारियों और मजदूरों की लंबित मांगों को लेकर आगामी 27 और 28 नवंबर को गुजरात के वडोदरा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस दो दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, भविष्य निधि (EPF), बोनस और बीमा से जुड़े मुद्दों पर ठोस रणनीति बनाना और सरकार के समक्ष अपनी मांगें प्रभावी ढंग से रखना है।
संघ की सबसे प्रमुख मांगों में कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में वृद्धि शामिल है। बीएमएस का प्रस्ताव है कि न्यूनतम पेंशन को वर्तमान राशि से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह किया जाए। इसके साथ ही, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को व्यापक बनाने के लिए अनिवार्य सदस्यता की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग की गई है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो मध्यम आय वर्ग के लाखों नए कर्मचारी इस बचत योजना के दायरे में आ जाएंगे।
बैठक में कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) के तहत दी जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा होगी। संघ चाहता है कि ESI के लिए पात्रता वेतन सीमा को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये प्रति माह किया जाए। इससे न केवल औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारी, बल्कि सेवा क्षेत्र के पेशेवरों का एक बड़ा हिस्सा भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आ सकेगा।
बदलते आर्थिक परिवेश में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले ‘गिग वर्कर्स’ (जैसे डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर आदि) की स्थिति पर बीएमएस ने चिंता जताई है। बैठक में इन श्रमिकों को बीमा कवर और अन्य वैधानिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। संघ का तर्क है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इन वर्कर्स को वर्तमान श्रम कानूनों के तहत सुरक्षा मिलना अनिवार्य है।
बोनस और ग्रेच्युटी में संशोधन का प्रस्ताव
बीएमएस ने बोनस और ग्रेच्युटी की गणना के मौजूदा तरीकों में भी बदलाव की वकालत की है। संघ की मांगें निम्नलिखित हैं:
बोनस: बोनस की गणना कर्मचारियों के वास्तविक कुल वेतन के आधार पर की जाए, न कि वर्तमान निर्धारित 7,000 रुपये की सीमा पर।
ग्रेच्युटी: ग्रेच्युटी की गणना के लिए आधार को 15 दिन के वेतन से बढ़ाकर 30 दिन का वेतन किया जाए। साथ ही, ग्रेच्युटी पर लगाई गई अधिकतम भुगतान सीमा को पूरी तरह हटाने की मांग भी शामिल है।
भारतीय मजदूर संघ का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं और कर्मचारियों के आर्थिक भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वडोदरा में होने वाली इस बैठक के निष्कर्ष और वहां से निकलने वाले प्रस्ताव आने वाले समय में सरकार और मजदूर संगठनों के बीच बातचीत की दिशा तय करेंगे। पेशेवर जगत और श्रमिक संगठन इस बैठक पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसके फैसलों का असर देश की लेबर मार्केट और औद्योगिक संबंधों पर पड़ना तय है।



