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संपादकीय : हादसे के बाद जागने का ढोंग करती व्यवस्था के अभ्यस्त होते हम!

गुजरात के गेम जोन और दिल्ली के एक बेबी केयर अस्पताल में लगी आग के बाद इन दिनों फायर विभाग सभी जगह गेम जोन, मॉल और अस्पतालों की चेकिंग कर रहा है । तो क्या यह चेकिंग और सर्वे किसी उद्देश्य के लिए किया जा रहे हैं या इन्हें दो हादसों के कारण अपने आक्रोश और डर को दबाने के लिए किया जा रहा है ।

मंगलवार को अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा गौतमबुद्धनगर द्वारा इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी डिपार्टमेंट, राज्य कर अधिकारी व मनोरंजन अधिकारी के साथ कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के मॉल व अन्य स्थानों पर संचालित गेमिंग जोन के निरीक्षण अभियान के तहत गेमिंग जोन का निरीक्षण किया गया। इसके बाद यह दावा किया गया है कि यह सब सुरक्षित है । पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार शहर के अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर जांच भी की जा रही है ।

पुलिस सूत्रों की माने तो व्यवस्था में फायर सेफ्टी को लेकर हो रहे यह सब कार्य खाना पूर्ति मात्र या फिर यूं कहे कि यह देश में हुई दो बड़ी दुर्घटनाओं के कारण पैदा हुए डर को शांत करने का प्रयास मात्र है क्योंकि जिले में ही नहीं पूरे देश में फायर विभाग के पास इतने कर्मचारी ही नहीं है कि वह शहर के सभी मॉल अस्पतालों में लगातार नियम पूर्वक इनका निरीक्षक और सर्वे करते रहे। एक जानकारी के अनुसार शहर में मौजूद अस्पतालों, हाई  राइज सोसाइटी,बिजनेस सेंटर की फायर सेफ्टी भगवान भरोसे ही है । इनमें दिखावटी तौर पर एनओसी ले ली जाती है और दिल्ली के बेबी केयेर सेंटर हादसे के बाद फायर विभाग बताता है कि उसकी एनओसी रिन्यू नहीं हुई थी, अकेले दिल्ली में ९० प्रतिशत अस्पताल ऐसे ही चल रहे हैं I ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि इस डिजिटल दौर में किसी भी बिल्डिंग की फायर एनओसी का रिन्यू ना होना किसकी गलती है?

तमाम दावों के बावजूद कोई भी बिजनेस सेंटर/अस्पताल आज भी सरकारी लाल फीता शाही में जाने से बचता है और फायर सेफ्टी ऑडिट में होने वाला खर्च सभी को अनावश्यक लगता है । ऐसे पूरे एनसीआर के अंदर फायर सेफ्टी कुछ ले देकर सेटल करके कागज हासिल करने जैसा खेल मात्र है और इस पूरे खेल में हम सभी शामिल है। दुर्भाग्य की बात यह है की सब कुछ जानते हुए भी हर बार सरकार से उम्मीद रखने वाले आमजन इसके लिए कब चेतेंगे  ।

4 जून के बाद बनने वाली नई सरकार क्या वाकई तीसरी कार्यकाल में हमारी इस व्यवस्था के आमूल चूल परिवर्तन पर भी ध्यान देगी या फिर देश बड़े-बड़े फैसले तो करता रहेगा पर सिस्टम में सुधार की बातें वैसे ही रहेंगे यह प्रश्न जनता सरकार सभी के लिए विचारणीय है ।

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