लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी से मुलाकात कर उनके कथित ब्राह्मण समाज विरोधी बयान पर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच चुप्पी तोड़ी। इस मुलाकात के बाद चर्चा है कि भाटी को पार्टी की ओर से अभयदान मिल गया हैI चर्चा है कि भाटी की जगह अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम बरतने की सख्त हिदायत दी।
दरअसल, राजकुमार भाटी के कथित बयान के बाद से ब्राह्मण समाज के विभिन्न नेताओं और संगठनों के साथ साथ पार्टी के विधायक , सांसद और समर्थक पत्रकारों, इन्फ्लुंसर रो द्वारा भी तीव्र विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, जिससे पार्टी पर कार्रवाई का दबाव बन रहा था। रविवार को प्रदेश मुख्यालय पर भाटी के अखिलेश यादव से भेंट करने के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी ने ब्राह्मण नेताओं के विरोध के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई न करने का मन बनाया है।
अखिलेश यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सामाजिक सद्भाव का आचरण करें और अपनी भाषा व व्यवहार में संतुलन एवं संयम बरतें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई बात न की जाए जिससे कोई अपने को अपमानित या आहत महसूस करे। यादव ने कार्यकर्ताओं को अपने मूल लक्ष्य से न भटकने की सलाह देते हुए कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाकर ही सामाजिक न्याय के राज की स्थापना की जा सकती है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी को एकजुट रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
सपा अध्यक्ष ने पार्टी की सामाजिक नीति में ‘सबका सम्मान’ निहित होने की बात कही। उन्होंने ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के साथ-साथ ‘पीड़ित अगड़े’ और ‘आधी आबादी’ (महिला) को भी अपने से जोड़ने की रणनीति का जिक्र किया। अखिलेश यादव ने ‘पीडीए’ को सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इसकी एकता से ही 2027 में भाजपा को सत्ता से हटाया जा सकेगा और समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।

अखिलेश का अभयदान क्या ब्राह्मण नेताओ को होगा स्वीकार ?
अखिलेश यादव के इन बयानों को राजकुमार भाटी विवाद पर विराम लगाने के साथ ही राजकुमार भाटी को मिले अभयदान पर पार्टी के ब्राह्मण नेताओ को भी सन्देश दिया गया है ताकि आने वाले चुनाव में पर्त्यी को कोई नुक्सान न हो किन्तु पार्टी के ब्राह्मण समर्थको और नेताओ की प्रतिक्रिया इस अभयदान पर क्या होगी ये देखने वाली बात होगी।
सपा नेता राजकुमार भाटी के एक के बाद एक विवादित बयान, जिन पर मचा मचा बवाल
आपको बता दें बीते दिनों राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज से लेकर जाट-गुर्जर समुदाय, पैगंबर मुहम्मद, रामचरितमानस और मंदिरों तक पर कई ऐसी टिप्पणियां की हैं, जिन पर जमकर बवाल मचा है।
ब्राह्मणों पर कसा तंज, समाज में नाराजगी
राजकुमार भाटी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मणों पर तंज कसते हुए एक दोहे का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान को ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक माना गया, जिसके बाद समाज में भारी नाराजगी देखने को मिली। भाटी के इस बयान की चौतरफा निंदा की गई। सबसे पहले सपा की सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले में राजकुमार भाटी पर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मायावती ने समाजवादी पार्टी को ब्राह्मण विरोधी करार दिया।
जाट-गुर्जरों पर विवादित टिप्पणी से बवाल
14 मई को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अखिल भारतीय जाट महासभा द्वारा किसान नेता चौधरी चरण सिंह और महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस मंच पर राकेश टिकैत और दीपेंद्र हुड्डा जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी में राजकुमार भाटी ने जाट और गुर्जर समाज को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा था, “एक आदमी की कई-कई पत्नियां हों, ये तो राम-कृष्ण, राजा-महाराजाओं और जमींदारों में होता था, लेकिन एक पत्नी के कई-कई पति हों, यह जाट-गुर्जरों में होता है।” इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसने जाट-गुर्जर समुदाय में भारी बवाल पैदा कर दिया।
पैगंबर मुहम्मद को बताया सबसे बड़ा महापुरुष
इससे पहले, एक टेलीविजन डिबेट के दौरान राजकुमार भाटी ने पैगंबर मुहम्मद को दुनिया का सबसे बड़ा महापुरुष करार दिया था। उन्होंने दावा किया था कि पैगंबर मुहम्मद इतिहास के एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने धर्म संस्थापक, समाज सुधारक और शासक की भूमिका एक साथ निभाई। भाटी ने उन्हें मानवता के लिए काम करने वाला और सभी मानव के लिए शिक्षा देने वाला बताया था। उनके इस बयान पर भी जबरदस्त हंगामा मचा।
मंदिरों पर भी उठाए सवाल, भगवान के अस्तित्व पर टिप्पणी
पैगंबर मुहम्मद की प्रशंसा के बाद सपा प्रवक्ता ने हिन्दू मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं पर भी अपनी राय रखी थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह मंदिर नहीं जाते। इसकी जरूरत न समझने के कारणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि “भगवान है या नहीं है। न कोई आदमी सिद्ध कर पाया कि भगवान है। न ही कोई यह सिद्ध कर पाया, भगवान नहीं है।” उनके इस बयान की भी खूब चर्चा हुई थी।
रामचरितमानस पर सवाल और मनुस्मृति को ‘कूड़ा’ करार
राजकुमार भाटी ने धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस को लेकर भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे एक बढ़िया काव्य मानते हुए भी कहा था कि इसमें “बड़ी संख्या में घटिया चौपाइयां” हैं। इसके साथ ही उन्होंने मनुस्मृति को “कूड़ा” करार दिया था, जिस पर भी खूब हंगामा हुआ और धार्मिक संगठनों ने उनकी आलोचना की।


