प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार, 14 मई को एक ऐसे गिरोह के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया, जिस पर दिवंगत आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी के ‘स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (एसआरएमएफ) की प्रमुख संपत्तियों को दस्तावेजों में हेराफेरी कर और खुद को पदाधिकारी बताकर अवैध रूप से बेचने का आरोप है। यह कार्रवाई तब हुई है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दे चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने 7 मई को एसआरएमएफ नामक पीड़ित संस्था से जुड़े इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था। ईडी ने अपनी कार्रवाई मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कम से कम सात पुलिस प्राथमिकियों (FIR) का संज्ञान लेकर की है।उन्होंने बताया कि जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय नामक व्यक्तियों से जुड़े परिसरों के अलावा ‘सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स’ नामक कंपनी और कुछ अन्य स्थानों पर भी तलाशी ली गई। अधिकारियों का दावा है कि ये दोनों व्यक्ति मुख्य संदिग्ध हैं और गहन साजिश के कथित सूत्रधार हैं।
यह मामला महर्षि महेश योगी की शिक्षाओं और आध्यात्मिक उत्थान के लिए स्थापित ‘स्पिरिचुअल रिजननरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की संपत्तियों की अवैध खरीद-फरोख्त से संबंधित है, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने पहले ही गंभीरता दिखाई थी। महर्षि संस्थान के श्रीकांत ओझा (एसआरएम फाउंडेशन ऑफ इंडिया) द्वारा की गई अपील को स्वीकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया था। यह टीम संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई बिक्री की गहन जांच करेगी।
मुख्य सचिव की निगरानी में होगी जांच
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने निर्देश दिया था कि इस SIT में ‘रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज’ को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। यह टीम संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई बिक्री की गहन जांच करेगी।

हाईकोर्ट का आदेश रद्द, जांच जारी रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें पुलिस को जांच रिपोर्ट (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(3) के तहत) दाखिल करने से रोका गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में इस तरह की रोक लगाना उचित नहीं है। पीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करें और आरोपी पक्ष जांच में पूरी तरह से सहयोग प्रदान करें।
तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट, होगी कड़ी कार्रवाई
अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संस्थान की जमीनों से जुड़े कई आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद संपत्तियों की बिक्री जारी है। कोर्ट ने SIT को तीन महीने के भीतर अपनी तथ्यान्वेषण रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। यदि जांच में धोखाधड़ी या आपराधिक मंशा (Mens Rea) पाई जाती है, तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि महर्षि महेश योगी ने कभी यह नहीं चाहा होगा कि उनके संस्थान की संपत्ति इस तरह विवादों और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ जाए। ईडी की ताज़ा कार्रवाई इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानून प्रवर्तन की गंभीरता को दर्शाती है, जिसका स्थानीय निवासियों और महर्षि महेश योगी के अनुयायियों पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।


