आशु भटनागर। अवध की रियासत इन दिनों गंभीर राजनैतिक घमासान की चपेट में है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ रही है। यह स्थिति ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ की पुरानी कहावत को चरितार्थ करती प्रतीत हो रही है। दरअसल, नबाब साहब की आँखों का तारा बने एक चौधरी की ब्राह्मण समुदाय के प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणी ने न केवल अवध में कोहराम मचा दिया है, बल्कि निर्वासन में दिल्ली से सत्ता वापसी का सपना देख रहे एक अन्य प्रभावशाली नवाब की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, बरसों से अवध की सत्ता प्राप्ति के लिए प्रयासरत नवाब साहब हाल ही में एक ब्राह्मण ज्योतिषी से अपनी कुंडली दिखा रहे थे। ज्योतिषी ने उन्हें सत्ता वापसी का योग तो बताया, किंतु साथ ही यह भी आगाह किया कि उनके कुछ करीबी दरबारी ही इस महत्वपूर्ण मोड़ पर उनके प्रयासों में बाधा डाल सकते हैं। यह चर्चा चल ही रही थी कि एक इन्टरनेट की गति से आये संदेशवाहक ने नवाब को सूचित किया कि उनके ‘मुंहलगे ‘चौधरी साहब’ ने एक मुशायरे के दौरान ब्राह्मणों के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी है, जिसमें वेश्याओं को ब्राह्मणों से बेहतर बताया गया है।
इस खबर ने नवाब साहब की भौंहें तान दीं। संदेशवाहक की बात सुनकर कुंडली देख रहे ब्राह्मण ज्योतिषी भी स्तब्ध रह गए और नवाब को प्रणाम कर बिना दक्षिणा लिए ही दरबार से चले गए। दरबार से बाहर आते ही उन्होंने इस दरबारी के ‘कांड’ की खबर नवाब साहब के प्रचार में लगे अन्य पंडितों तक पहुंचाई, जिसके बाद पूरे शहर में पंडितों में चौधरी साहब के खिलाफ आक्रोश फ़ैल गया, आक्रोश बढ़ा तो विरोध शुरू हुआ और इसमें उनके पुतले जलाना भी शामिल था।
इधर नवाब साहब , जो किसी भी कीमत पर अपनी सत्ता वापसी की राह में कोई रोड नहीं चाहते हैं, उन्होंने गुस्से में ‘चचा जान’ को संदेश भिजवाया कि चौधरी साहब को तत्काल निष्कासित किया जाए। निष्कासन की बात सुनकर चौधरी साहब के तो होश उड़ गए। यह सोचते हुए कि राजनीतिक संरक्षण खोने के बाद वे कहां जाएंगे, उन्होंने बड़े भारी मन से हाथ जोड़कर पंडितों से माफी मांगी। उनका तर्क था कि यदि उनसे कोई गलती हो गई हो तो उन्हें क्षमा कर दिया जाए, वे तो बस बड़े-बुजुर्गों की कहावतें सुना रहे थे।

चौधरी साहब को लगा कि इस माफीनामे से दीन हीन दरिद्र ब्राह्मण शांत हो जाएंगे और नवाब भी संतुष्ट हो जाएंगे। किंतु ऐसा हुआ नहीं। विरोधी खेमे ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया और इसे ब्राह्मणों के सम्मान से जोड़कर प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया बोले अगर कहावते सूना रहे थे तो उस समय हंस क्यूँ रहेथे। अब बेचारे चौधरी साहब ‘प्याज भी खा रहे हैं और जूते भी’, यानी उन्हें माफ़ी के बाद भी चौतरफा आलोचना और अपमान का सामना करना पड़ रहा है और निष्काशन की तलवार भी लटक रही है।
मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया तो चौधरी साहब ने अपने साथियों को जागृत कर बचाव के बजाय आक्रामक रुख अपनाने के निदेश दिए है। निर्देश पाते ही चौधरी साहब के लठेतो ने सार्वजानिक उद्घोष करते हुए कहा कि ” अरे जब चौधरी साहब ने माफी मांग ली है तो बात खत्म कर देनी चाहिए कल को चौधरी को कुछ हो गया तो कौन ज़िम्मेदार होगा और कौन सजा भुगतेगा?
पर विधि का विधान देखिये इतनी बड़ी धमकी के बाद भी दीन हीन दरिद्र कहे जाने वाला ब्राह्मण समुदाय झुकने को तैयार नहीं है और उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्राह्मणों का कहना है कि ऐसे डंडे के जोर पर माफ़ी कौन मांगता है ? चौधरी को सम्ह्हाओ नहीं तो इस बार नबाब साहब की ईंट से ईंट बजा देंगे।
उधर, चौधरी साहब के समझाने के बाबजूद नवाब किसी भी सूरत में ब्राह्मणों से बैर लेने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि यह उनकी सत्ता वापसी की राह में सीधा रोड़ा बन रहा है। उन्होंने ‘मुंहलगे’ चौधरी साहब को तीन दिन का अल्टीमेटम दे दिया है: या तो इस विवाद को तीन दिन के भीतर शांत करो, या फिर अपना बोरिया-बिस्तर बांध लो।
अल्टीमेटम के दो दिन बीत चुके हैं और कहानी चौधरी साहब और ब्राह्मण समुदाय के बीच आकर फंस गई है। चौधरी साहब ‘लट्ठ लेकर तैयार’ बैठे हैं कि जब उन्होंने माफी मांग ली तो ब्राह्मण क्यों नहीं मान रहे, जबकि ब्राह्मण कह रहे हैं कि ऐसे डंडा मारकर कौन माफी मांगता है? ब्राह्मणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और वे जगह-जगह दरबारी के पुतले जलाने पर आमादा हैं।
चौधरी साहब परेशान हैं कि नवाबों के समाजवाद में यह कैसी हवा चल रही है, जहाँ कभी ‘दरिद्र’ समझे जाने वाले ब्राह्मण इतनी मुखर होकर आवाज उठा रहे हैं। उनके समर्थक उन्हें समझा रहे हैं कि महाराज, मामला एक बार सही होने दो, फिर इनको देखेंगे; अभी तो ‘लट्ठ’ की जगह दंडवत दिखाये, नहीं तो ‘लट्ठ चलाने की योग्यता’ भी काम नहीं आएगी।
ब्राह्मण के गुस्से और नवाब साहब के अल्टीमेटम से चौधरी साहब हैरान और परेशान हैं। अगले एक दिन में यह देखना दिलचस्प होगा कि अवध की इस ‘अंधेर नगरी’ में इस सियासी घमासान का क्या अंजाम होता है?
नोट : चौधरी साहब के समर्थको के सूचनार्थ, ये लेख व्यंग के तोर पर लिखा गया है, इसका किसी भी व्यक्ति से सम्बन्ध संयोग हो सकता है कृपया इसे दिल पर लेकर न पढ़े


