नोएडा। 13 अप्रैल को नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों, सत्यम वर्मा और आकृति, के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों की भूमिका भीड़ को उकसाने और हिंसा की पूरी साजिश रचने में सबसे अहम पाई गई है।
पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और स्थानीय खुफिया रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 13 अप्रैल की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन से पहले ही सत्यम वर्मा और आकृति ने फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर लोगों को एकजुट करना शुरू कर दिया था। आरोप है कि इन माध्यमों पर भड़काऊ संदेश फैलाकर भारी संख्या में लोगों को निर्धारित स्थान पर बुलाया गया था।
डिजिटल साक्ष्य और गवाहों ने खोली पोल
जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं। इनमें सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया चैट्स शामिल हैं। इसके अलावा, कई गवाहों के बयानों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदर्शन के दौरान दोनों आरोपी मौके पर मौजूद थे और भीड़ को उकसाने का काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन्हीं भड़काऊ गतिविधियों के कारण शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया था।
सार्वजनिक संपत्ति को पहुंचाया गया था नुकसान
बीती 13 अप्रैल को नोएडा के एक प्रमुख क्षेत्र में हुए इस प्रदर्शन ने तब हिंसक मोड़ ले लिया था जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान न केवल पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया था। इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल था, जिसे देखते हुए पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान शुरू की थी।

पुलिस का आधिकारिक बयान
नोएडा पुलिस ने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “सत्यम और आकृति ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि शहर की शांति भंग करने की गहरी साजिश रची थी। पर्याप्त सबूतों के आधार पर उन पर NSA लगाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अराजक तत्वों में कानून का डर बना रहे।”
अन्य संदिग्धों पर भी कस रहा शिकंजा
मामले में कार्रवाई केवल इन दो आरोपियों तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी सर्विलांस और वीडियो फुटेज के जरिए दर्जनों अन्य संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है।पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
भड़काऊ सामग्री फैलाने वाले सोशल मीडिया ग्रुप्स के एडमिन की भी निगरानी तेज कर दी गई है।आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना है।
प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से यह साफ है कि नोएडा में शांति व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने की कोशिश करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय निवासियों ने भी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है।


