आशु भटनागर । “हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, हमारी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।” 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म दिलजले का यह डायलॉग आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर पूरी तरह सटीक बैठता है। बीते 10 वर्षों से सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रहे अखिलेश यादव के लिए चुनौती विपक्षी दल कम और उनकी अपनी पार्टी के ‘ प्रथम पंक्ति ने नेता’ अधिक नजर आ रहे हैं।
2017 से 2022 तक: हार का वही पुराना पैटर्न
2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने जब 2017 का चुनाव हारा, तो इसकी एक बड़ी वजह घर के भीतर की कलह और पार्टी के कुछ नेताओं के विवादास्पद कार्यकलाप थे। लेकिन 2022 के चुनावों में जब समाजवादी पार्टी जीत के बेहद करीब दिख रही थी, तब स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के बयानों ने पासा पलट दिया। चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि मतदान से ठीक पहले अधिकारियों और सवर्ण वर्ग के बीच जो माहौल बना था, उसे इन बयानों ने भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण करने का मौका दे दिया। अब ठीक उसी राह पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता राजकुमार भाटी चलते दिखाई दे रहे हैं।
राजकुमार भाटी – ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी से बयानवीर बने माफ़ीवीर!
ताजा मामला जातियों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन का है। जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज की तुलना कथित तौर पर ‘वेश्याओं’ से कर दी। हालांकि उन्होंने इसे एक पुरानी घटना के संदर्भ में उद्धृत किया था, लेकिन इसने पार्टी के भीतर और बाहर एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।पूर्व सपा विधायक संतोष पांडेय ने कहा की राजकुमार भाटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है, वे जातीय वैमनस्य फैलाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के पदचिह्नों पर चल रहे है।
सपा के भीतर ही एक धड़ा यह मान रहा है कि भाटी ने यह बयान जानबूझकर दिया है। पार्टी के ब्राह्मण नेताओं का आरोप है कि जब अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ सवर्णों को जोड़ने और ब्राह्मणों के सम्मान की बात कर रहे हैं, तब ऐसे समय में 30-35 साल पुरानी किसी बात का जिक्र कर जहर घोलने की क्या आवश्यकता थी?

माफी के बाद जहां एक और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पूरे प्रकरण पर मिट्टी डालो जैसा बयान देने की बातें शुरू करी है वहीं समाजवादी पार्टी के ही प्रचार कर रहे कई समर्थक पत्रकारों तक ने राजकुमार भाटी को सेल्फ गोल करने वाला नेता बता दिया है ।
इनके सर्वोच्च नेता पंडित जी से पूछ कर घर से पैर बाहर निकालते हैं और ये ब्राह्मण के इस दोहे का ज़िक्र खींसे निपोर कर कर रहे हैं…
ब्राह्मण की तुलना वेश्या से वाला कथित मुहावरा सुना रहे हैं सपा नेता राजकुमार भाटी!! pic.twitter.com/Fhz9YK2qbu
— Mamta Tripathi (@MamtaTripathi80) May 12, 2026
पार्टी के भीतर ‘हमजा अली जरदारी’ की आहट?
समाजवादी पार्टी के समर्थको के बीच चर्चा है कि जिस तरह बंगाल चुनाव में भाजपा ने कुछ चेहरों को ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल किया, क्या उसी तर्ज पर विपक्षी दलों ने सपा के भीतर कुछ ‘छिपे हुए हमजा अली जरदारी’ बैठा रखे हैं? ब्राह्मण नेताओं का तर्क है कि राजकुमार भाटी कमोबेश स्वामी प्रसाद मौर्य की उसी लाइन पर चल रहे हैं, जिसने 2022 में पार्टी को सत्ता की दहलीज से दूर कर दिया था।
माफी या मजबूरी? – “अभी तो हमें और जलील होना है।”
विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी की स्थिति तनु वेड्स मनु की फिल्म के उस दृश्य जैसी हो गई है जहां अभिनेत्री कहती है, “अभी तो हमें और जलील होना है।” पार्टी सूत्रों की माँने तो ब्राह्मण नेताओं द्वारा उन्हें, सस्पेंशन, निष्काशन, राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटाने की मांग के बाद भाटी बैकफुट पर आ गए हैं। देर शाम उन्होंने न केवल सफाई दी, बल्कि माफी भी मांगी। उनका तर्क है कि 9 मिनट के भाषण में से केवल 7 सेकंड की क्लिप चलाकर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। पर सवाल वही है—चुनावी आहट के बीच इस तरह के विवादास्पद प्रसंग छेड़ने की जरूरत ही क्या थी?
ज्योतिष और राजनीति का मेल, सूर्य की ख़राब दशा राजकुमार भाटी के लिए अशुभ!
इस बीच, राजकुमार भाटी के इस विवाद पर कटाक्ष करते हुए एक ज्योतिषी ने कहा कि ऐसा लगता है कि “राजकुमार भाटी इस समय सूर्य की खराब दशा से गुजर रहे हैं ऐसे जातक अक्सर अपनी बातों से शीघ्र विवादों में घिर जाते हैं । ज्योतिष और भविष्य को लेकर भी राजकुमार भाटी ने बीते दिनों भले ही तमाम हास-परिहास की बातें की हो किंतु फिलहाल इस बात से सहमत हुआ जा सकता है। देखा जाए तो राजकुमार भाटी कुछ समय से लगातार मेहनत के बावजूद न सिर्फ विवादों में गिरते रहे हैं बल्कि मेहनत के परिणाम नकारात्मक भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में क्या समाजवादी पार्टी उन्हें ब्राह्मण नेताओ की मांग पर प्रवक्ता पद से हटाकर कुछ समय आराम करने को रहेगी या फिर समाजवादी पार्टी भी तनु वेड्स मनु के उसे बयान को आत्मसात कर लेगी कि “अभी तो हमें और जलील होना है”


