नोएडा की राजनीति में बुधवार का दिन प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के लिए विरोधाभासों से भरा रहा। एक तरफ जहां पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर से मिलकर दलित समुदाय के एक व्यक्ति के समर्थन में खड़ा दिख रहा था, वहीं ठीक उसी वक्त पार्टी के ही एक अन्य कथित पूर्व लोकसभा प्रत्याशी और ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे वाले नेता पर एक दलित की जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लग रहे थे। इस ‘उलटबांसी’ ने शहर में समाजवादी पार्टी की दलितों के प्रति प्रतिबद्धता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
पुलिस कमिश्नर से मिले सपा नेता, मोनिंदर के समर्थन में उठे स्वर
दरअसल, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से मुलाकात करने पहुंचा। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य नोएडा के सेक्टर 150 में डूबते सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को बचाने के लिए पानी में उतरे मोनिंदर के समर्थन में खड़ा होना था। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से मिलकर मनिंदर पर पुलिस द्वारा ‘झूठे मुकदमे’ दर्ज करने का आरोप लगाया और मामले की निष्पक्ष जांच कर न्यायोचित कार्यवाही की मांग की। हालांकि, पुलिस सूत्रों की मानें तो मनिंदर ने युवराज को बचाने की कोशिश भले ही की हो, लेकिन उस पर क्षेत्र में पहले से ही कई मुकदमे दर्ज हैं, और पुलिस केवल उन पर नियमानुसार कार्यवाही कर रही है।
ठीक उसी समय, नोएडा मीडिया क्लब में सपा नेता पर लगे जमीन हड़पने के आरोप
लेकिन नियति का खेल देखिये, जिस वक्त समाजवादी पार्टी का यह प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर से मिलकर दलित उत्पीड़न पर सहानुभूति जता रहा था, ठीक उसी वक्त नोएडा मीडिया क्लब में एक अन्य दलित व्यक्ति गंभीर आरोपों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा था। उसके निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के ही कथित तौर पर पूर्व लोकसभा प्रत्याशी और ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा बुलंद करने वाले एक नेता थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले दलित व्यक्ति ने आरोप लगाया कि भंगेल में सपा नेता ने उनकी 1000 वर्ग मीटर जमीन पर कोर्ट के आदेश और एसडीएम की पैमाइश के बावजूद चारदीवारी नहीं होने दी है। उन्होंने बताया कि जब-जब वे अपनी भूमि पर चारदीवारी करने के लिए पुलिस प्रशासन से सहायता मांगते हैं, तब-तब सपा नेता सभा के बड़े नेताओं से प्रशासन को फोन करवा देते हैं, जिसके चलते प्रशासन कभी पुलिस बल न होने का बहाना करके, तो कभी कुछ अन्य बहानों से इस कार्य में लगातार देरी कर रहा है।

“PDA की आड़ में दलितों को परेशान कर रही सपा!”
मीडिया से बात करते हुए इस दलित व्यक्ति ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर ‘PDA’ की आड़ में दलितों को ही परेशान करने का सीधा आरोप तक लगा दिया। इन दो परस्पर विरोधी घटनाओं के बाद शहर में समाजवादी पार्टी की दलितों के प्रति सहानुभूति और कथित शोषण दोनों को लेकर चर्चाएं गर्म हो गई हैं। अब देखना ये है कि समाजवादी पार्टी का नेतृत्व इस पूरे मामले परक्या कहता है , ताकि सपा ‘दलितों के साथ या दलितों के खिलाफ’ की इस दुविधा का कुछ स्पष्टीकरण मिल सके।


