आशु भटनागर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दादरी विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत’ जनसभा के बाद क्षेत्र की राजनीति में नया उबाल आ गया है। इस जनसभा में उमड़े जनसमूह ने न केवल भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सोशल मीडिया युद्ध को जन्म दिया है, बल्कि भाजपा के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी और वर्चस्व की जंग को भी उजागर कर दिया है।
रैली बनाम रैली: भीड़ के आंकड़ों पर घमासान
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दादरी में वर्चस्व की यह लड़ाई नई नहीं है। लगभग चार महीने पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा आयोजित ‘पीडीए रैली’ को सपा समर्थकों ने ऐतिहासिक करार दिया था। लगभग एक साल की तैयारी के बाद अव्यवस्था से भरी उस रैली में करीब 10,000 लोगों की उपस्थिति को 50 हजार और एक लाख बता कर और सड़कों पर लगे लंबे जाम के आधार पर यह दावा किया गया था कि आगामी कई वर्षों तक कोई इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाएगा।
अब राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में दादरी ब्लॉक प्रमुख विजेंद्र सिंह भाटी द्वारा दादरी स्थित आर.वी. नॉर्थलैंड कॉलेज में आयोजित हालिया ‘आत्मनिर्भर भारत’ जनसभा ने उन दावों को कड़ी चुनौती दी है। इस रैली या जनसभा की खासियत थी कि इसका ग्राउंड समाजवादी रैली के ग्राउंड के मुकाबले बड़ा था कार्यक्रम के आयोजन में सभी व्यवस्थाएं समुचित ढंग से की गई थी। बड़े मैदान और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार लगभग 20,000 लोगों की भीड़ जुटी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सपा समर्थकों का तर्क है कि जितनी भीड़ आज बीजेपी की रैली में थी उतनी तो अखिलेश जी किसी शोक व्यक्त करने में जाते है तब होती है, जबकि भाजपा समर्थक इसे अपनी अजेय सांगठनिक क्षमता का प्रमाण बता रहे हैं। समर्थको का वयवहार, भीड़ और वयवस्था के हिसाब से भाजपा की रैली समाजवादी पार्टी की रैली के मुकाबले बेहतर दिखाई देती है I भाजपा रैली भीड़ नियंत्रण में थी, मंच पर अनुमति प्राप्त लोग थे, पंखो, कूलर और पीने के पानी तक की बेह्टर व्यवस्था थी जबकि सपा रैली में भीड़ अनियंत्रित थी, गर्मी के मौसम में भी पंखो और पीने के पानी की वयवस्था नहीं थी, लोग कार्यक्रम में ही बेहोश तक हुए हालांकि, गुर्जर समाज के एक तटस्थ वर्ग का मानना है कि दोनों ही रैलियां समाज की थीं, इसलिए इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का रूप देना अनुचित है।

भाजपा के भीतर का ‘पावर गेम’: किसने किया कार्यक्रम ‘हाईजैक’?
इस पूरे प्रकरण में सबसे दिलचस्प पहलू भाजपा का अंदरूनी सियासी समीकरण रहा। दादरी के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि असली मुकाबला भाजपा बनाम सपा न होकर स्वयं भाजपा के दो दिग्गज नेताओं—राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर (Surendra Singh Nagar) और लोकसभा सांसद डॉ. महेश शर्मा (Dr. Mahesh Sharma) के बीच दिखाई दिया।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी मेहनत राज्य सभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर, विजेंद्र सिंह भाटी और उनकी टीम ने की थी। किंतु कार्यक्रम के दौरान परिदृश्य तब बदल गया जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद डॉ. महेश शर्मा अपनी मजबूत टीम के साथ पहुंचे। डॉ. शर्मा के साथ दादरी विधायक तेजपाल नागर, महामेघा नागर, जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी और दादरी नगरपालिका चेयरमैन गीता पंडित जैसे नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने कार्यक्रम का पूरा फोकस बदल दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि सुरेंद्र सिंह नागर के नवाब सिंह नागर को आगे कर राजनैतिक लाभ लेने के खेल को डॉ. महेश शर्मा ने रणनीतिक तरीके से इस मंच के जरिए जिले में अपनी राजनीतिक सर्वोच्चता का संदेश दिया। वहीं अपने संबोधन में डा शर्मा के “गुर्जर बिरादरी का कर्जदार हूँ मैं…” जैसे डायलोग से जनसभा तालियों और जयघोष से गूंज उठी। इस भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बयान ने न केवल उपस्थित जनसमूह का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि पूरे आयोजन की चर्चा का केंद्र भी बन गया।

यधपि सुरेन्द्र सिंह नागर ने डॉ महेश शर्मा के राजनैतिक दांव को बदलने के लिए अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी की रैली को टारगेट कर ये बताने की कोशिश करी कि आज उन्होंने उस रैली के जरिये भाजपा को रहे नुक्सान को लाभ में बदल दिया गया है। उनके स्वागत के समय उनके समर्थको ने ज़बरदस्त जयकारे भी लगाए कई समर्थक तो उत्साहित होकर मीडिया के लिए बनाये गये बाक्स में आ घुसे और पत्रकारो के स्थान पर भी काबिज हो गए पर कार्यक्रम की लाईमलाईट डा महेश शर्मा से न ले पाए।
सोशल मीडिया पर गुर्जर समाज के ही एक नेता ने लिखा कि महेश शर्मा जी और सुरेन्द्र नागर जी मैं आपस में कोई मुकाबला नहीं है। डाक्टर साहब जनता की राजनीति करते हैं अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हैं और अपने साथियों को आगे बढ़ाते है जबकि माननीय सुरेन्द्र सिंह नागर जी की राजनीति केवल सिमित लोगों तक है ना उन्होंने कभी किसी को नेता बनाया और ना कभी किसी को बनाने वाले।
टिकट की दावेदारी और दादरी विधायक तेजपाल नागर का भविष्य
जनसभा के मंच से दादरी विधानसभा सीट के भावी सियासी समीकरण भी स्पष्ट होते दिखे। मंच पर आयोजक विजेंद्र सिंह भाटी, इंद्र नागर और सत्येंद्र अवाना जैसे चेहरे ही टिकट के मुख्य दावेदारों के रूप में मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे। 100 से अधिक भाजपा नेताओं को तमाम सिफारिश के बाबजूद मंच पर चढ़ने तक का मौका नहीं मिला इसमें कई दादरी से टिकट के दावेदार भी बताये गये। बड़ी मुश्किल से आखिर में क्षेत्रीय युवा अध्यक्ष की दौड़ में शामिल पूर्व जिला युवा अध्यक्ष अन्नू पंडित को मंच पर मौका मिला और उन्होने उसे जाने नहीं दिया।

वहीं, इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के बाद यदि कोई सबसे अनिश्चित स्थिति में नजर आ रहा है, तो वह हैं वर्तमान दादरी विधायक मास्टर तेजपाल नागर। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि विधायक तेजपाल नागर का राजनीतिक भविष्य और तीसरी बार टिकट की उम्मीदें अब पूरी तरह से डॉ. महेश शर्मा के रुख पर निर्भर हैं। कई लोगो का दावा है डा महेश शर्मा को खुश करने के लिए सुरेन्द्र नागर और नरेंद्र भाटी जैसा कद्दावर गुर्जर नेताओं के सामने इसीलिए तेजपाल नागर डा महेश शर्मा को गुर्जरों का सबसे बड़ा हितैषी बताने से भी नहीं चुके। यधपि सोशल मीडिया पर ही एक मत ये भी कहा जा रहा है कि आयोजक और दादरी क्षेत्र से ही ब्लाक प्रमुख विजेंद्र सिंह भाटी को इस रैली करने का फल विधायक के टिकट के रूप में मिल सकता है क्योंकि अबकी बार डा महेश शर्मा किसी की भी सिफारिश दादरी पर नहीं करंगे उनका ध्यान किसी और सीट पर अधिक रहेगा, अब सच क्या है ये समय ही बताएगा।
नीला आसमान सो गया – नबाब सिंह नागर
वहीं पुरे कार्यक्रम के केंद्र में रहे नवनामित क्षेत्रीय अध्यक्ष नबाब सिंह नागर कार्यक्रम के बाद खाली हाथ दिखाई दिए I दरअसल डॉ. महेश शर्मा ने रणनीतिक राजनितिक दांव ने नबाब सिंह नागर का हाल आखिर में बस इज्जत बच जाने जैसी कर दी I सोशल मीडिया पर उनको लेकर लिखा गया कि जो कार्यक्रम केवल क्षेत्रीय अध्यक्ष के स्वागत का था, उसका विस्तार करके प्रदेश अध्यक्ष का भी स्वागत समारोह जोड दिया गया और बाद में उसे भाजपा की रैली बना दिया गया I पोस्टर पर विवाद से जहाँ नबाब सिंह नागर को लखनऊ जाकर सफाई देनी पड़ी, वहीं कार्यक्रम की तिथि बदले जाने के बाद में कार्यक्रम के फोकस से भी हटना पड़ा I बचा खुचा काम डा महेश शर्मा के कार्यक्रम हाइजैक करने के तरीके ने कर दिया I कार्यक्रम के बाद लोग नबाब सिंह नागर की जगह डा महेश शर्मा के लिए बोले कि “कुछ भी कहों डाक्टर साहब का कोई जवाब नहीं है” तो किसी ने ये भी लिखा कि “आज नवाब सिंह नागर के समर्थन में आए भारी जनसमूह ने दिखा दिया कि दादरी और गौतम बुद्ध नगर की भाजपा राजनीति में वह सबसे नंबर वन पर है” पर कई ने उनका “सिलसिला” फिल्म के गीत “नीला आसमान सो गया” वाला हाल बता दिया।
प्रदेश अध्यक्ष का सन्देश – एक रहो
दादरी की इस जनसभा ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों से पहले गौतम बुद्ध नगर में राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। जहां एक ओर सपा और भाजपा गुर्जर बहुल इस क्षेत्र में अपनी पकड़ साबित करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा के भीतर की ‘माइक्रो-पॉलिटिक्स’ और गुटबाजी आने वाले दिनों में और दिलचस्प मोड़ ले सकती है। यधपि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी इस पुरे खेल को समझते हुए कार्यकर्ताओं और नेताओं को एक रहने का सन्देश दे गये I उन्होंने वर्ष 2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत कार्यकर्ताओं और आम जनता से संगठनात्मक व सामाजिक एकजुटता बनाने के लिए कहा कि जो रिकॉर्ड नोएडा गौतम बुध नगर लोकसभा और पांचो विधानसभाओं में भाजपा ने बनाया है उस रिकॉर्ड को 2027 में फिर से दोहराना है, भाजपा की सरकार बनानी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि विरोधियों की कोई चाल कामयाब नहीं होनी चाहिए आज यहां से यह संकल्प लेकर जाना है कि प्रधानमंत्री जी का 2047 का विकसित भारत का जो संकल्प है उसको देश और प्रदेश दोनों में सरकारी होने पर ही पूरा किया जा सकता है ऐसे में दिल्ली के साथ-साथ प्रदेश में भी तीसरी बार अब भाजपा की सरकार ही बनानी होगी । पर सोशल मीडिया पर छिड़ा यह डिजिटल युद्ध फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। इसके परिणाम भी आने वाले दिनों में ही दिखाई देंगे।



