नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का सोमवार को संचालन शुरू होना जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ है, वहीं इसके पहले दिन का कार्यक्रम राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर जिले के गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सांसद डॉ. महेश शर्मा और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर समेत भाजपा संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों की अनुपस्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और यह चर्चा गर्म है कि क्या यह महज एक विकास का उत्सव था या किसी एक राजनेता का सुनियोजित शक्ति प्रदर्शन।
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह का ‘एकल’ प्रदर्शन
एयरपोर्ट के संचालन के पहले दिन का सर्वाधिक श्रेय जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह को जाता दिख रहा है। तड़के से ही वे प्रमुख लोगों की अगुवाई करते हुए सक्रिय दिखे। धीरेंद्र सिंह न केवल स्थानीय किसानों के एक दल को लेकर लखनऊ तक गए, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाने में भी सफल रहे। मुख्यमंत्री ने भी इस पहल की सराहना करते हुए जेवर विधायक और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के प्रयासों को सराहा। जिले के प्रभारी मंत्री कुंवर बृजेश सिंह और केंद्रीय उड्डयन मंत्री भी कार्यक्रम में उपस्थित थे, लेकिन धीरेंद्र सिंह का स्थानीय नेतृत्व और सक्रियता अप्रत्याशित रूप से सुर्खियों में रही।
प्रमुख जनप्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी
हालांकि, इस भव्य अवसर पर जिले के लोकसभा सांसद डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, अन्य विधानसभा क्षेत्रों के विधायक और भाजपा जिला संगठन के पदाधिकारियों की अनुपस्थिति ने लोगों के बीच असमंजस पैदा कर दिया। एक ऐसे कार्यक्रम से इनकी गैर-मौजूदगी, जो क्षेत्र के लिए दशकों से प्रतीक्षित था और राष्ट्रीय महत्व का है, स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है। लोगों के बीच यह चर्चा गर्म रही कि आखिर इतने महत्वपूर्ण दिन पर जिले के सबसे प्रमुख भाजपाई चेहरे क्यों नदारद थे?
निमंत्रण पर उठे सवाल: SMS बनाम सम्मान
सूत्रों की मानें तो इन प्रमुख जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को कार्यक्रम के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा ही नहीं गया था। उन्हें सिर्फ एक सामान्य एसएमएस के जरिए कार्यक्रम की जानकारी दी गई, जिसे उनके करीबियों ने पार्टी के भीतर अपने वरिष्ठ नेताओं के प्रति अपेक्षित सम्मान की कमी के रूप में देखा है। इस तरह के बड़े आयोजन में, जहां केंद्रीय मंत्री स्वयं उपस्थित हों, जनप्रतिनिधियों को मात्र एक टेक्स्ट संदेश से सूचित करना राजनीतिक शिष्टाचार का उल्लंघन माना जा रहा है।

जब इस अनुपस्थिति पर सवाल किए गए, तो संबंधित नेताओं ने सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि वे केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने से संबंधित कुछ पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त थे। यह तर्क हालांकि एक बड़े, राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट के उद्घाटन से उनकी गैर-मौजूदगी को कितना न्यायसंगत ठहराता है, यह अपने आप में एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। क्या केंद्र सरकार के कार्यक्रम इतने अटूट थे कि उन्हें नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन जैसी एक बार की घटना के लिए भी टाला नहीं जा सकता था?
क्या यह सिर्फ एक राजनेता का शक्ति प्रदर्शन था?
जो प्रश्न सबसे मुखर होकर उभर रहा है, वह यह है कि क्या नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला दिन सिर्फ विकास का उत्सव था या किसी एक राजनेता का सुनियोजित शक्ति प्रदर्शन? जिस तरह से जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने पूरे कार्यक्रम को अपने नेतृत्व में संचालित किया, स्थानीय किसानों को मुख्यमंत्री से मिलवाया और मुख्यमंत्री से सीधे सराहना प्राप्त की, वह संकेत देता है कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर स्थानीय स्तर पर पनप रही गुटबाजी और शक्ति संतुलन में बदलाव का एक स्पष्ट संकेत था।
यह घटनाक्रम सिर्फ एक कार्यक्रम में अनुपस्थिति का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और संभावित खेमेबंदी की ओर इशारा करता है। क्या यह जानबूझकर किया गया एक राजनीतिक कदम था, जिससे एक विशिष्ट नेता को लाइमलाइट में लाया जा सके और दूसरों को हाशिए पर रखा जा सके? यदि ऐसा है, तो यह पार्टी की एकजुटता और संदेश को कमजोर कर सकता है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का ऑपरेशनल होना निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक क्षण है, लेकिन इसके पहले दिन की राजनीतिक बिसात ने जिले के सियासी तापमान को निश्चित तौर पर बढ़ा दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस आंतरिक असंतोष और शक्ति प्रदर्शन को कैसे संबोधित करता है, क्योंकि इस तरह की घटनाएं पार्टी की सांगठनिक स्थिरता के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जातीं।


