नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग के ‘जीएम’ की जय हो: बारिश आई तो याद आई सीवर लाइन, 14 नए टेंडरों के ‘खेल’ पर उठे सवाल

superadminncrkhabar
5 Min Read

आशु भटनागर। यूं तो नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यशैली, लापरवाही और भ्रष्टाचार पर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) भी चिंता व्यक्त कर चुकी है, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी इससे कोई सबक सीखने को तैयार नहीं हैं। साल भर एसी कमरों में बैठकर शहर की गलियों से लेकर सीवर और ड्रेनेज सिस्टम के ‘ऑल इज वेल’ होने के बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारियों की पोल मानसून की पहली बारिश ने ही खोल कर रख दी।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

हद तो तब हो गई जब मंगलवार को हुई बारिश के बाद शहर में हुए भारी जलभराव को देखकर जल विभाग के जीएम आर.पी. सिंह को अचानक कुछ ध्यान आया। बुधवार को उन्होंने आनन-फानन में 14 नए टेंडर जारी कर दिए। जल विभाग का दावा है कि शहर में जलभराव का मुख्य कारण पुरानी और खराब सीवर लाइनें हैं, जिन्हें बदलने के लिए ये टेंडर जारी किए गए हैं।

- Advertisement -
Ad image

पहले बताया था ‘टेढ़ी खीर’, अब बारिश में जागी सुध

इस पूरे घटनाक्रम पर सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि कुछ महीने पहले जब मीडिया ने जल विभाग के अधिकारियों से इन सीवर लाइनों के बदलाव को लेकर सवाल पूछे थे, तब अधिकारियों ने इसे बेहद ‘जटिल और कठिन’ कार्य बताकर टाल दिया था। सवाल यह उठता है कि जो काम कुछ महीने पहले नामुमकिन सा लग रहा था, उसके लिए बारिश के मौसम में अचानक इतनी तत्परता क्यों दिखाई जा रही है? क्या बारिश के इस सीजन में इन टेंडर्स के जरिए जलभराव की समस्या को रोका जा सकेगा?

जानकारों और विशेषज्ञों की मानें तो इसका उत्तर ‘ना’ है। जल खंड-1 द्वारा जारी किए गए इन 14 टेंडरों की प्रक्रिया पूरी होने और काम धरातल पर शुरू होने तक इस साल की बरसात बीत जाएगी। इस कार्य का परिणाम (यदि कुछ हुआ तो) अगली बरसात में ही दिखेगा।

- Advertisement -
Ad image

रिटायरमेंट से पहले ‘आपदा में अवसर’?

प्राधिकरण के गलियारों में चर्चा है कि इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ा ‘कैच’ है। जल विभाग के जीएम आर.पी. सिंह इसी फाइनेंशियल वर्ष में सेवानिवृत्त (रिटायर) होने वाले हैं। ऐसे में जब तक इन टेंडरों के काम की गुणवत्ता और जवाबदेही तय करने का समय (यानी अगली बरसात) आएगा, तब तक जीएम साहब सेवानिवृत्त होकर जा चुके होंगे। अगली बरसात में जब फिर जनता पानी में डूबेगी और मीडिया सवाल करेगी, तब ठीकरा फोड़ने के लिए कोई नया अधिकारी कुर्सी पर बैठा होगा।

ऐसे में यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या प्राधिकरण के पास नोएडा जैसे विश्वस्तरीय शहर के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने की कोई 3 या 5 वर्षीय दीर्घकालिक योजना है, या फिर हर बार की तरह समस्या आने पर ‘आपदा में अवसर’ तलाशते हुए केवल टेंडरों का खेल खेला जाता रहेगा?

कागजों पर सफाई, जमीन पर गाद: ओएसडी ने खोली पोल

एक तरफ जल विभाग नए टेंडर जारी करने में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ वर्तमान में चल रहे कार्यों की जमीनी हकीकत खुद प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश उजागर कर रहे हैं। ओएसडी इंदु प्रकाश लगातार सोशल मीडिया पर अधिकारियों और ठेकेदारों की पोल खोलते वीडियो साझा कर रहे हैं।

ठेकेदारों ने ऑन-पेपर नालों की सफाई का काम पूरा बुनियादी तौर पर दिखा दिया है और भुगतान उठाने की तैयारी में हैं। लेकिन जब ओएसडी इंदु प्रकाश खुद डंडा डालकर नालों की गहराई नापते हैं, तो वह गाद और मलबे से लबालब भरे मिलते हैं।

जनता का सवाल: समाधान या सिर्फ टेंडर का नाटक?

ऐसे में थोड़ी सी ही बारिश से चारो और जल भराव से परेशान नोएडा की जनता आज यह पूछ रही है कि जब वर्तमान में चल रहे ड्रेनेज और सफाई के काम ही लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं, तो 14 नए टेंडरों से क्या बदलाव आएगा? जल विभाग को नए टेंडर के जरिए समस्या से भागने के बजाय, वर्तमान में मौजूद कमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था। लेकिन नोएडा प्राधिकरण की इस ‘फायर फाइटिंग’ (आग लगने पर कुआं खोदने) वाली कार्यशैली ने एक बार फिर उसकी नीयत और नीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Share This Article