आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश का सबसे एडवांस शहर नोएडा, किंतु आज भी यहां साफ सफाई के लिए के तौर तरीके बाबा आदम के जमाने के हैं । सीवर चाहे प्राधिकरण के निर्देश पर ठेकेदार साफ कर रहा हो या फिर प्राधिकरण की लीज जमीन पर बनी सोसाइटियों में ठेकेदार साफ कर रहा हो किंतु मशीनों से सफाई के बड़े-बड़े दावे करने वाले महाप्रबंधक जल आरपी सिंह पूरे मामले पर फेल नजर आते हैं । नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर 93 के गेझा में सीवर लाइन में दम घुटने से सफाई कर्मचारी की तेरहवीं भी नहीं हुई कि नोएडा की ही एक और सोसाइटी एल्डेको में बने एसटीपी टैंक में ठेकेदार शशिकांत शर्मा की गैस से दम घुटने से मृत्यु हो गई ।
दरअसल देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से मुकाबला करने उतरे उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी नोएडा को भले ही सबसे उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक शहर माना जाता है पर यहां के अधिकारियों की कार्यशैली आज भी बाबूओ वाली है। जिनका मुख्य कार्य टेंडर में कमीशन पर अधिक होता है, प्राधिकरण में काम लेने के ठेकेदार आज भी तय कीमत से 40 प्रतिशत कम तक टेंडर डाल रहे है तो फिर वो आधुनिक तौर तरीको का प्रयोग क्यूँ करेंगे? और कमीशन पर ध्यान देने वाले अधिकारी ठेकेदार कैसे काम कर रहा है उसको कैसे कुछ कह सकेंगे ?
11 दिन के अंदर एक ही पैटर्न पर दो मृत्यु हुई तो बवाल मचना स्वाभाविक है,तमाम प्रश्न उठे है । सोसाइटी की मेंटेनेंस कमेटी पर आरोप है कि उसने रात के 2:30 बजे इस कार्य को अंजाम दिया किंतु क्या दिन में अगर इस कार्य को किया जाता तो गैस नहीं बनती, उत्तर है तब भी यही होता। क्योंकि प्रश्न दिन या रात का नहीं प्रश्न आज भी सीवर और एसटीपी की सफाई मशीनों की जगह आदमी को टैंक में उतार कर करवाने से है।
मुद्दा ये है कि जब प्राधिकरण स्वयं आज भी मशीनों से सीवर की सफाई नहीं करवा पा रहा तो वो किस मुह से सोसाइटी में उन्ही बातो के लिए सोसाइटी के मेंटिनेंस कम्पनी को दोषी बता पायेगा ?
ऐसे में प्राधिकरण से फिर से प्रश्न यह है कि इतने आधुनिक शहर में अब तक जल सीवर विभाग के जी एम जल आर पी सिंह शहर के सीवर और सोसाइटी के एसटीपी टैंक जैसी सफाईयों के लिए ऑटोमेटेड मशीनों से सफाई को एक आदत क्यों नहीं बना पाएI आखिर ऐसा कैसे होता है कि उनके अपने प्राधिकरण क्षेत्र में कार्यरत ठेकेदार हो या फिर आधुनिक तकनीक पर बनी हाईराइज सोसाइटी में बने एसपी टैंक की सफाई के लिए काम करने वाले ठेकेदार दोनों ही आज भी इस परंपरागत तौर तरीकों से सफाई करने में लगे हुए हैं । आखिर बड़े बड़े दावे करने वाले प्राधिकरण के जीएम आरपी सिंह पूरे शहर में सफाई के काम करने वाले ठेकेदारों का आज तक कोई सिस्टम (SOP) क्यों नहीं बना पाए है, और अगर कहीं बनाये है तो उनका पालन क्यूँ नहीं करवा पा रहे हैं। आखिर इन ठेकेदारों को काम करवाने के पैरामीटर क्या है?

घटना के बाद मीडिया में आया नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक जल आरपी सिंह का बयान भी मुहं चिडा रहा है। महाप्रबंधक प्रबंधक जल आरपी सिंह ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि घटना के बारे में पता चला है यह सोसाइटी प्रबंधन का कार्य है। घटना के संबंध में नोटिस देकर जवाब तलब कर जांच करवाई जाएगी यानी कि इस पूरे प्रकरण पर प्राधिकरण का कोई उत्तरदायित्व नहीं है । प्रश्न यह है कि अगर महाप्रबंधक का उत्तरदायित्व उनके कार्य क्षेत्र में हो रहे किसी भी घटनाक्रम पर नहीं है तो फिर महाप्रबंधक जल क्यों बनाए गए है ।
जीएम जल आर पी सिंह के बीते कुछ सालों के विवादित कार्यो को देखें तो इनमें यमुना की बेल्ट में तालाब बनाकर उसे रोज 50 एमएलडी पानी देने जैसा कारनामा है या फिर नोएडा फेस 3 क्षेत्र में ऐसे वेटलैंड बनाने का कारनामा है जिनके कारण थोड़ी सी बारिश पढ़ते ही पानी शहर में बैक करने लगता है। बीते दिनों हुई बारिश में जब जगह पानी भरा तो प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने इन वेटलैंड का पानी एक-एक मीटर नीचे कराया तब जाकर शहर से वॉटर लॉगिंग खत्म हुई। जिन रेनीवेलपर वो अपनी पीठ थपथपाते हैं उनके बाबजूद पुरे शहर में आज भी लोग पानी में टीडीस को लेकर शिकायते वैसी ही कर रहे है I
ऐसा प्रश्न यह है कि बड़े बड़े दावो से इतर क्या इस शहर को एक ऐसे कंपोजिट सिस्टम की आवश्यकता है जहां एसटीपी और जल से संबंधित परियोजनाओं पर अकाउंटेबिलिटी को मासिक रूप से चेक किया जाए क्योंकि नोएडा प्राधिकरण में लगभग 100 से अधिक सोसाइटी है जिनमे अपने एसटीपी बनाए गए हैं हालांकि एक यह भी सच है कि यह एसटीपी क्षमता से कम कैपेसिटी के हैं और इसका निर्माण भी प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत के होना संभव नहीं है । और यही कारण है कि अक्सर सोसाइटी में समस्याएं होती है ।
किंतु इन सबसे अलग फिर भी एक प्रश्न सामने खड़ा होता है कि आखिर शहर के सीवर और सोसाइटियों के एसपी टैंक की रखरखाव साफ-सफाई को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या महाप्रबंधक जल बस घटना होने के बाद जांच करने के लिए हैं ? क्या हर मृत्यु के बाद मिलने वाले मुआवजे को दिखाकर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी संतुष्ट हो जाते हैं या फिर फिर इस बार नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश में उच्च अधिकारियों पर अपना कार्य ठीक से न करने के संतुति शासन से कर पाएंगे?



