राजधानी से सटे नोएडा के थाना फेज-3 क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जो उत्तर प्रदेश शासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एफएनजी (FNG) विहार, गढ़ी चौखंडी में जमीन पर अवैध कब्जे, बर्बर मारपीट और पुलिसिया अकर्मण्यता से परेशान एक पीड़ित परिवार ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उन्हें इंसाफ नहीं मिला, तो वे परिवार सहित अनशन पर बैठेंगे और आत्मदाह करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
चौकी इंचार्ज की मौजूदगी में प्लॉट पर कब्जे का आरोप
पीड़ित के अनुसार, एफएनजी विहार गढ़ी चौखंडी में उनके भाई वीरेंद्र भगत के नाम पर एक प्लॉट है। आरोप है कि तैयब नाम के एक व्यक्ति ने दबंगई के बल पर इस प्लॉट पर अवैध कब्जा कर लिया। पीड़ित का सीधा आरोप है कि इस कब्जे में उस समय के चौकी इंचार्ज अंकित तरार की सीधी संलिप्तता थी, जिन्होंने पीड़ित परिवार को ही थाने में बिठाकर कब्जा करवाया।
थाना स्तर पर सुनवाई न होने के बाद पीड़ित ने एडिशनल डीसीपी (ADD DCP) से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जांच के आदेश दिए गए, जिसमें थाना फेज-3 के एसएचओ (SHO) की जांच में भी यह साबित हुआ कि प्लॉट पर गलत तरीके से कब्जा किया गया है।
गुंडों ने पीट-पीटकर तोड़े दोनों हाथ, दो महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं
जांच के बावजूद दबंगों के हौसले इतने बुलंद थे कि जब वीरेंद्र भगत अपने प्लॉट पर मौजूद थे, तब तैयब ने अपने गुंडों के साथ मिलकर उन पर जानलेवा हमला कर दिया। लाठी-डंडों से की गई इस बर्बर मारपीट में वीरेंद्र भगत के दोनों हाथ टूट गए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में सिर्फ मामूली मारपीट का केस दर्ज किया। मेडिकल (MLC) रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने (अपडेटेड FIR) का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी न तो एफआईआर में धाराएं बढ़ाई गई हैं और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है।
प्रशासनिक नाकामी और पुलिस पर साठगांठ के गंभीर आरोप
यह पूरा मामला अब सिर्फ एक जमीनी विवाद नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि थाना फेज-3 के मौजूदा एसएचओ और चौकी इंचार्ज भी आरोपियों से मिले हुए हैं। जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बाद भी कार्रवाई का न होना, स्थानीय निवासियों के बीच कानून-व्यवस्था पर गंभीर अविश्वास पैदा कर रहा है।
1 हफ्ते का अल्टीमेटम: अनशन और आत्मदाह की चेतावनी
पीड़ित ने अपनी बात रखते हुए कहा, “हमारी कानून और न्याय व्यवस्था में पूरी आस्था है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो आम आदमी कहां जाए? अगर मुझे और मेरे परिवार को न्याय नहीं मिलता है, तो मैं अपने पूरे परिवार के साथ अनशन पर बैठूंगा। इसके बाद भी सुनवाई न होने पर 1 हफ्ते बाद मैं आत्मदाह करूंगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी।”




