उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला आगरा जिले का है, जहां यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की अधिसूचित भूमि पर नियम विरुद्ध तरीके से ‘ड्रीम एस एवेन्यू’ कॉलोनी का मानचित्र स्वीकृत कर दिया गया। इस बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद अब गौतम बुद्ध नगर समेत अन्य प्राधिकरण क्षेत्रों में भी जिला पंचायतों द्वारा धड़ल्ले से पास किए जा रहे नक्शों और अवैध कॉलोनियों के खेल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आगरा में ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
आगरा के एत्मादपुर तहसील के धरैरा गांव में यीडा की अधिसूचित भूमि पर हुए इस खेल का खुलासा एडीएम (नागरिक एवं आपूर्ति) अजय नारायण सिंह की जांच रिपोर्ट में हुआ है।
जांच के मुताबिक, 23 सितंबर 2024 को यीडा ने धरैरा गांव और आसपास की भूमि की अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत इस क्षेत्र में बिना प्राधिकरण की अनुमति के किसी भी तरह का कार्य प्रतिबंधित था। इसके बावजूद, गर्ग एग्री इनपुट प्राइवेट लिमिटेड ने 8 जनवरी 2025 को बाह के एसडीएम कार्यालय में कृषि भूमि को आबादी क्षेत्र घोषित करने का आवेदन दिया। हैरानी की बात यह है कि यह क्षेत्र एत्मादपुर तहसील के अंतर्गत आता है, लेकिन इसके बावजूद एसडीएम बाह ने 21 अप्रैल 2025 को इस भूमि को आबादी घोषित कर दिया।
इसके तुरंत बाद, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने 2 मई 2025 को इस भूमि पर विकसित हो रही ‘ड्रीम एवेन्यू’ कॉलोनी का मानचित्र स्वीकृत कर दिया। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कॉलोनी के अंदर ग्राम समाज की गाटा संख्या 646 की 0.0580 हेक्टेयर भूमि पर भी अवैध कब्जा किया गया है। आदित्य राज शर्मा की शिकायत पर डीएम मनीष बंसल ने जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद अब नक्शा निरस्त करने और ग्राम सभा की भूमि को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।
गौतम बुद्ध नगर में भी जोरों पर है अवैध मानचित्रों का खेल
आगरा की इस घटना ने गौतम बुद्ध नगर जिले में चल रहे ऐसे ही तमाम मामलों को एक बार फिर हवा दे दी है। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यीडा के अधिसूचित क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा मानचित्र पास करने का यह कोई पहला मामला नहीं है।
इससे पहले गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र में भी प्राधिकरण भूमि पर जिला पंचायत द्वारा मानचित्र पास किए जाने का मामला तूल पकड़ चुका है, जिसकी शिकायत जेवर विधायक द्वारा भी की गई थी, हालांकि तब मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
सूत्रों और जानकारों का आरोप है कि प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतें सचिव की उस सलाह का गलत फायदा उठा रही हैं, जो मूल रूप से आम लोगों को केवल अपने व्यक्तिगत मकान बनाने के लिए दी गई थी। बिना टाउन प्लानर और योग्य आर्किटेक्ट वाली जिला पंचायतों के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं ने मिलकर इसे अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है।
जनता की मांग: हो निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई
गौतम बुद्ध नगर में अकेले पिछले एक साल के भीतर रिश्वत के खेल के सहारे सैकड़ों अवैध कॉलोनियों और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के मानचित्र पास किए जाने की चर्चा आम है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस प्रकार आगरा में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है, उसी तर्ज पर गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी को भी पिछले एक वर्ष में जिला पंचायत द्वारा पास किए गए सभी मानचित्रों का डेटा निकालकर उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।
जब तक ऐसे मामलों में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और राजनेताओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सुनियोजित विकास के सपने को कागजों पर ही दम तोड़ना पड़ेगा। प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों का यह दखल अब केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा बन चुका है।





