आशु भटनागर। शहर के बुनियादी ढांचे और आर्थिक परिदृश्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, 5 सितंबर 2026 को नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक मुख्य प्रशासनिक भवन, सेक्टर-96 के सभागार में आयोजित की गई। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त और नोएडा के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई दूरगामी और रणनीतिक निर्णय लिए गए, जो निवेशकों, रियल एस्टेट खरीदारों और स्थानीय किसानों के लिए बेहद अहम साबित होंगे।
इस उच्चस्तरीय बैठक में नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्णा करूणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एन.जी. रवि, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र भाटिया, नोएडा प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी,नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पुष्पराज, विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर सिंह,संतोष कुमार, एन के सिंह,जीएम आर पी सिंह, एस पी सिंह व ए के अरोरा, निदेशक उधान आनंद मोहन सिंह व सहायक महाप्रबंधक शोभा कुशवाहा सहित बोर्ड के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
किसानों के लिए मुआवजे में लगभग 53% की ऐतिहासिक वृद्धि
नोएडा के समग्र विकास में कृषकों की सक्रिय सहभागिता और उनके योगदान को रेखांकित करते हुए बोर्ड ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आपसी समझौते के आधार पर क्रय की जाने वाली भूमि के मुआवजे को बढ़ाकर ₹6,459 प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है, साथ ही 5 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड का लाभ भी दिए जाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है।
गौरतलब है कि पूर्व में या तो ₹5,324 प्रति वर्ग मीटर (आबादी भूखंड रहित) या ₹4,224 प्रति वर्ग मीटर (आबादी भूखंड सहित) का प्रावधान था। प्रचलित दरों में एकमुश्त लगभग 53% की यह वृद्धि किसानों को सीधे तौर पर क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि में भागीदार बनाएगी। इसके अलावा, DNGIR (न्यू नोएडा) के विभिन्न चरणों में भी ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अनुरूप आकर्षक प्रतिकर और आबादी भूखंड देने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।

रुकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं (Legacy Projects) को गति
कोविड और अन्य कारणों से अटकी रुकी हुई भू-संपदा परियोजनाओं के समाधान के लिए शासन की नीति के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिन 25% देय राशि का भुगतान करने वाले 23 आवंटियों को शेष 75% जमा करने के नोटिस जारी किए गए थे, उनके भुगतान के सापेक्ष रजिस्ट्रियों की अनुमति दी गई है। अब तक 36 परियोजनाओं से ₹540.75 करोड़ और अन्य आंशिक भुगतानों सहित कुल ₹561.35 करोड़ जमा हो चुके हैं। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों में वसूली और फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
बुनियादी ढांचा और पर्यावरण से जुड़े अहम फैसले
- पुलिस कमिश्नरेट के लिए भूमि: गौतमबुद्धनगर पुलिस आयुक्त कार्यालय की प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सेक्टर-153 में लगभग 13,347.18 वर्ग मीटर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।
- सेक्टर-145 में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट: शहर में सूखे और आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण हेतु सेक्टर-145 में 100 TPD (टन प्रतिदिन) क्षमता का थर्मोलिसिस आधारित ‘इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी एंड रिसोर्स रिकवरी फैसिलिटी’ स्थापित की जाएगी। इस संयंत्र की स्थापना के लिए एजेंसी का चयन ईओआई (EOI) और आरएफपी (RFP) प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
औद्योगिक इकाइयों के लिए एकरूप नीति का गठन
औद्योगिक विकास को और सुगम बनाने के लिए ‘दृष्टिपत्र, 2025’ के तहत नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच एकरूप नीति लाने का निर्णय लिया गया है। अंतरण शुल्क (Transfer Charges), इकाई को क्रियाशील करने की समयावधि और अन्य शुल्कों को तर्कसंगत बनाने के लिए दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति के गठन को अनुमोदित किया गया है। यह निर्णय निवेशकों और उद्योगों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को मजबूत करेगा।
सहकारी आवासीय समितियों के वर्तमान कब्जेदार (Sub-lessees) को राहत
नोएडा में सहकारी आवासीय समितियों के ग्रुप हाउसिंग भूखंडों पर बने फ्लैटों के वर्तमान कब्जाधारियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का अंत करते हुए, त्रिपक्षीय उप-पट्टा (Tripartite Sub-lease) प्रलेख पंजीकृत करने की नीति को स्वीकृति दे दी गई है। यह कदम न केवल वैध कब्जाधारियों को उनकी संपत्ति के कानूनी दस्तावेज दिलाएगा, बल्कि शासन के लिए स्टाम्प ड्यूटी राजस्व को भी सुनिश्चित करेगा।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नोएडा प्राधिकरण का यह बोर्ड सत्र शहरी विकास, औद्योगिक सुगमता और सामाजिक संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण है। जहां एक ओर किसानों को उनकी भूमि का बेहतर मूल्य देकर विकास योजनाओं में उनका विश्वास जीता गया है, वहीं दूसरी ओर अटकी हुई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और औद्योगिक नीतियों में एकरूपता लाकर निवेशकों को स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं कि नोएडा भविष्य के व्यावसायिक विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार है।







