उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नोएडा प्राधिकरण में हुए करीब 4000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जमीन घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्तगी के समय वह कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने सोमवार को उनकी बर्खास्तगी का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
हरीश चंद्र इससे पहले वर्ष 2018 में भी निलंबित हो चुके हैं। उस समय वह मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी पद पर तैनात थे। उन पर सेवानिवृत्त कर्नल वीएस चौहान को एक मामले में जेल भेजने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप लगे थे। बाद में कर्नल की शिकायत के आधार पर हरीश चंद्र, उनकी पत्नी और बेटे समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला वर्ष 2011 का है, जब हरीश चंद्र नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अपनी तैनाती के समय नोएडा प्राधिकरण की अर्जित और कब्जा प्राप्त भूमि को नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से लीजबैक (Leaseback) करा दिया था।
विभागीय जांच में सामने आया कि एक्सप्रेसवे के पास स्थित शहादरा गांव की करीब 3 लाख 81 हजार 527 वर्गमीटर जमीन के नियम विरुद्ध लीजबैक किए गए थे। इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 3,800 से 4,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह जमीन नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के पास सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 के नजदीक स्थित है और 45 से 75 मीटर चौड़ी सड़कों से लगी होने के कारण बेहद बेशकीमती है।
नियमों को ताक पर रखकर बाहरी लोगों और कंपनियों को दिया फायदा
जांच रिपोर्ट के अनुसार, नियमों के तहत लीजबैक की सुविधा केवल संबंधित गांव के मूल किसानों के लिए थी। एक परिवार के नाम अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन लीजबैक किए जाने का प्रावधान था। लेकिन हरीश चंद्र पर आरोप है कि उन्होंने इन नियमों को दरकिनार कर दिया।
जांच में खुलासा हुआ कि गांव के गैर-निवासी लोगों और तीन निजी कंपनियों (एस्टर इलेक्ट्रिक, महानंदा इलेक्ट्रानिक व प्रयास गारमेंट) के नाम पर 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के बड़े भूखंड लीजबैक कर दिए गए। आरोप यह भी है कि आबादी के निर्धारण के लिए सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल किया जाना था, जिसे तथ्यों को छिपाने के लिए नजरअंदाज किया गया। समिति के सामने भ्रामक रिपोर्ट पेश कर भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाया गया।
लंबी चली जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद गिरी गाज
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 सितंबर 2013 को ही अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करते हुए मेरठ के मंडलायुक्त को जांच सौंपी गई थी। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी को भी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र की संलिप्तता और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी।
शासन स्तर पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की 6 जनवरी 2022 को दी गई सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2024 (आदेश में उल्लिखित तथ्यों) के आधार पर यह सख्त कार्रवाई की गई है।
लीजबैक मामले में कार्रवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन नायब तहसीलदार मनोज कुमार को कार्यमुक्त किया गया था। वहीं, तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (लैंड) अजय श्रीवास्तव और तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। अब शासन ने हरीश चंद्र की सेवा समाप्त कर इस मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है।




