आशु भटनागर। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की 93वीं बोर्ड बैठक सोमवार को संपन्न हो गई। चेयरमैन की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के औद्योगिक विकास को रफ्तार देने और निवेश को धरातल पर उतारने के लिए कई बड़े आंकड़े और समीक्षाएं पेश की गईं। हालांकि, प्राधिकरण द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में जहां एक ओर तमाम औद्योगिक पार्कों की प्रगति का जमकर बखान किया गया, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ माने जाने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म सिटी योजना पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली गई।
इस रहस्यमयी खामोशी के बाद अब स्थानीय निवासियों और निवेशकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यमुना प्राधिकरण फिल्म सिटी को लेकर क्या छुपा रहा है?
औद्योगिक पार्कों की समीक्षा: आंकड़ों में दिखा विकास
बोर्ड बैठक के दौरान संचालक मंडल के सामने प्राधिकरण क्षेत्र में चल रही औद्योगिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई। यीडा के अनुसार 4,000 वर्गमीटर से अधिक आकार के 295 औद्योगिक भूखंडों में से 181 की लीज डीड पूरी हो चुकी है। 152 आवंटियों को कब्जा दे दिया गया है, 69 पर निर्माण जारी है और 13 इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। मेडिकल डिवाइस पार्क (सेक्टर-28) में 203 भूखंडों के सापेक्ष 123 भूखंड आवंटित किए गए हैं। 75 पर कब्जा और 28 में निर्माण शुरू है। यहां 3D प्रोटोटाइप लैब, इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली फैसिलिटी, IoMT और टूलिंग रूम जैसी आधुनिक सुविधाओं पर काम जारी है। सेक्टर-29 के अपैरल पार्क में 159, एमएसएमई पार्क में 503 और हैंडीक्राफ्ट पार्क में 188 भूखंड आवंटित हो चुके हैं। सेक्टर-33 के टॉय पार्क में 148 भूखंड दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि लीज डीड, नक्शा स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है।
बंद कमरे की बैठक और बोनी कपूर की मौजूदगी पर सस्पेंस
एक तरफ जहां प्रेस विज्ञप्ति में औद्योगिक विकास की सुनहरी तस्वीर पेश की गई, वहीं फिल्म सिटी परियोजना का जिक्र तक न होना चौकाने वाला रहा। सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड बैठक के दौरान बे व्यू भूटानी फिल्म सिटी प्राइवेट लिमिटेड के निर्माता बोनी कपूर और आशीष भूटानी थोड़ी देरी से पहुंचे। बोर्ड बैठक खत्म होने के बाद प्राधिकरण अधिकारियों और उनके बीच बंद कमरे में अलग से चर्चा हुई। हालांकि, इस वार्ता का क्या परिणाम निकला, इसे प्राधिकरण और बोनी कपूर दोनों पक्षों ने गुप्त रखा है। बैठक से बाहर निकलते समय बोनी कपूर और आशीष भूटानी के चेहरे के भाव यह साफ बयां कर रहे थे कि भीतर स्थिति सामान्य नहीं थी।
आखिर कहां फंसा है पेच?
सेक्टर-21 में 230 एकड़ में फिल्म सिटी का पहला चरण विकसित किया जाना है। एसपीवी (बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी) को इसे 3 साल में पूरा करना है और प्रथम चरण के तहत स्टूडियो व इंस्टीट्यूट के निर्माण के लिए मानचित्र भी स्वीकृत हो चुके हैं। गड़बड़ी की जड़ ‘ऑडिट एजेंसी’ के चयन को माना जा रहा है। नियमों के मुताबिक, पीपीपी (PPP) मॉडल की इस परियोजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र ऑडिट एजेंसी/इंजीनियरिंग एजेंसी का चयन होना आवश्यक है। इसी ऑडिट के मुद्दे पर पिछली बोर्ड बैठक में भी फैसला टल गया था और इस बार भी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
एनसीआर खबर का सवाल: 2027 के विधान सभा चुनाव से पहले पूरा होगा सपना?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि फिल्म सिटी के निर्माण में हो रही देरी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या यमुना प्राधिकरण की ओर से प्रशासनिक अड़चनें और नियम खड़े किए जा रहे हैं? या फिर बोनी कपूर की कंपनी इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से पीछे हटने या बाहर निकलने के रास्ते तलाश रही है?
फिल्म सिटी का आरम्भ होने से इस क्षेत्र में 40 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की बाते कहीं गयी थी ऐसे में गौतम बुद्ध नगर ही नहीं उत्तर प्रदेश के निवासियों और रोजगार की आस लगाए युवाओं के लिए यह परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि क्षेत्र की तकदीर बदलने वाला जरिया है। किन्तु घोषणा के 5 वर्ष और बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी के साथ अग्रीमेंट होने के 1.5 वर्ष बाद भी दोनों ही पक्ष खुलकर बोलने से बच रहे हैं, जिससे जनता के बीच संशय बढ़ रहा है। क्या मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले धरातल पर उतर पाएगा, या यह सिर्फ कागजों और बंद कमरों की बैठकों तक ही सीमित रह जाएगा? प्राधिकरण और बेव्यू भूटानी फिल्म सिटी दोनों को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।




