यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने आज (सोमवार) अपनी 93‑वीं बोर्ड बैठक समाप्त की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025‑26 तथा 2026‑27 की तिथियों तक की आय‑व्यय स्थिति, तथा औद्योगिक‑मिश्रित भूमि योजना, लॉजिस्टिक्स‑हब एवं दीर्घकालिक रख‑रखाव के लिए नई नीतियों पर विस्तृत चर्चा की गयी । यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक में चेयरमैन आलोक कुमार, यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह, नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ पुष्पराज सिंह, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह, यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया, मनीष मीना, राजेश कुमार सिंह, ओएसडी शैलेंद्र सिंह सहित वित्त, प्रोजेक्ट और विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
वित्तीय वर्ष 2025‑26 (14 सितम्बर 2025 तक) में YEIDA की कुल प्राप्तियां रु 1,495.43 करोड़ रही। वहीं केवल एक वर्ष बाद, 2026‑27 (14 सितम्बर 2026 तक) में यह आंकड़ा रु 42,223.7 करोड़ तक पहुँच गया – जो पिछले वर्ष से 182.35 % अधिक है।
विशेषकर औद्योगिक/मिक्स‑लैंड योजना के तहत रु 2,420.7 करोड़ की राजस्व प्राप्ति हुई, जो निर्धारित बजट का 174.47 % बनती है। यह आंकड़ा YEIDA के भूमि‑परिवर्तन और निवेश आकर्षण की ताकत को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
2025‑26 के वित्तीय वर्ष में कुल व्यय रु 2,333.72 करोड़ रहा, जबकि 2026‑27 में यह रु 5,501.71 करोड़ तक बढ़ा। इस अंतर का बड़ा हिस्सा रु 1,73,579 करोड़ भूमि अधिग्रहण तथा विभिन्न बैंकों से ली गई ऋण की अदायगी में हुआ। उसी अवधि में ऋण अधिग्रहण व ब्याज के लिये रु 4,344.34 करोड़ खर्च किए गए।
दीर्घकालिक रख‑रखाव निधि का परिचय
बोर्ड ने “लंबी अवधि के वित्तीय स्थायित्व (2026‑27)” नामक एक विशेष निधि की स्थापना का निर्णय लिया। इस निधि में वित्तीय नियमानुसार गैर‑आवर्ती प्राप्तियां एवं पात्र आय को अलग‑अलग रखकर सुरक्षित निवेश किया जाएगा।
निवेश से उत्पन्न ब्याज व अनुमानित रासी का उपयोग सड़क, जलपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, स्ट्रीट‑लाइट, पार्क, ग्रीन बेल्ट आदि नागरिक सुविधाओं की मरम्मत और रख‑रखाव के लिये किया जाएगा। निधि की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और निगरानी के लिये भी कठोर प्रोटोकॉल स्थापित किए जाएंगे।
महायोजना‑2041: मल्टी‑मॉडल लॉजिस्टिक पार्क की दिशा
बोर्ड ने “महायोजना‑2041” के तहत लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग गतिविधियों को सुदृढ़ करने की पहल को स्वीकृति दी। यह योजना 2024‑25 के मानकों के अनुरूप मल्टी‑मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के विकास पर केन्द्रित है, जहाँ पात्र निवेशकों को भूखंड उपलब्ध कराकर आधुनिक सप्लाई‑चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्मित किया जाएगा।
ठोस अपशिष्ट‑प्रबंधन की दिशा में नई रणनीति
बैठक में पर्यावरण‑सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न प्रकार के औद्योगिक और घरेलू अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु एक व्यापक “अपशिष्ट प्रबंधन एवं नियंत्रण नीति – 2026” का मसौदा तैयार किया गया। इस दस्तावेज़ को आधिकारिक रूप से प्रकाशित कर अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया भी स्वीकृत हुई।
किसान‑हित में तेज़ भूमि‑प्रदान प्रक्रिया
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण से प्रभावित पात्र किसानों के 07 प्रतिषत भूखण्ड उपलब्ध कराने के प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। अब तक 10,069 किसानों के आरक्षण पत्र जारी किये जा चुके हैं तथा 4978 भूखण्ड का नियोजन विभिन्न सेक्टरों में किया जा चुका है। किसानों के हित में प्राधिकरण द्वारा 64.7 प्रतिषत अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ देते हुए अब तक लगभग 3,142 करोड़ की अतिरिक्त प्रतिकर रषि किसानों को वितरित की जा चुकी है।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक में भूमि क्रय प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था, जिसमें यीडा मास्टर प्लान फेज-1 के अंतर्गत गौतमबुद्धनगर एवं बुलंदशहर में आपसी सहमति से भूमि क्रय के लिए निर्धारित नई दरों को लागू करने की स्वीकृति दी गई थी। नई दरों के अनुसार ₹4,558 प्रति वर्गमीटर तथा एक्सप्रेसवे सहित ₹4,037 प्रति वर्गमीटर की दर से भूमि क्रय किया जा रहा है। इसके साथ 7 प्रतिशत आबादी भूखण्ड का प्रावधान भी है।




