आशु भटनागर: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ‘ग्रेप’ (GRAP) के नियम लागू किए जाने के बावजूद ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है। शहर का AQI पिछले तीन दिनों से 256 से 328 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो ‘खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है।
खुले में निर्माण सामग्री का भंडारण
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-12 स्थित कमर्शियल बेल्ट में एक निर्माण परियोजना के प्लॉट पर पर्यावरण नियमों की कथित तौर पर अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। एनसीआर खबर को मिली जानकारी के अनुसार, सेक्टर 12 में बन रहे एक कमर्शियल प्रोजेक्ट निराला गेटवे (Nirala Gateway C7, Sector 12, west, Greater Noida) के पास एक खुले प्लॉट पर बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री खुले में डाली गई है, जिससे उड़ने वाली धूल आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण को और बढ़ा रही है। आरोप है कि यह सामग्री पिछले एक महीने से अधिक समय से बिना किसी ढकाव के खुले में पड़ी है।
जिम्मेदारी तय करने में असमर्थ नजर आ रहे विभाग
पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और बढ़ते प्रदूषण के इस मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जब इस संबंध में संबंधित विभागों से जानकारी ली गई, तो अधिकारियों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निराला गेटवे प्रोजेक्ट के पास जिस प्लॉट पर यह निर्माण सामग्री डाली गई है, उसे हाल ही में एक नए डेवलपर द्वारा खरीदा गया है, हालांकि अभी इसकी औपचारिक रजिस्ट्री होना बाकी है। ऐसे में एक तरफ जहाँ नया डेवलपर इस कार्य से अपना पल्ला झाड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह तय करने में विफल नजर आ रहे हैं कि इस स्थिति के लिए किसकी जिम्मेदारी तय की जाए और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना किस पर लगाया जाए। प्रश्न ये है कि अगर इस निर्माण सामग्री का मालिक कोई नहीं तो प्रशासन ने इसे अब तक जब्त क्यूँ नहीं किया है
स्थानीय निवासियों पर पड़ रहा प्रभाव
प्रशासनिक विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी और सुस्त रवैये का खामियाजा मुख्य रूप से निर्माण स्थल के आसपास रहने वाले आम नागरिकों और सोसाइटी के निवासियों को भुगतना पड़ रहा है। खुले में पड़ी निर्माण सामग्री से उठने वाली धूल से हवा की गुणवत्ता और अधिक खराब हो रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निर्माण स्थलों पर नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों पर बिना किसी टालमटोल के कार्रवाई नहीं होगी, तब तक एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।



