लखनऊ/नोएडा: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह न केवल कानून व्यवस्था के मामले में सख्त है, बल्कि प्रदेश के मेहनतकश मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए भी उतनी ही संवेदनशील है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक केंद्र गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिला है, जहां वेतन में ₹3000 तक की सीधी वृद्धि की गई है। अकुशल श्रमिकों को ₹13,690, अर्ध-कुशल को ₹15,059 और कुशल श्रमिकों को ₹16,868 प्रतिमाह मिलेंगे।
अशांति से समाधान तक: जब ‘महाराज’ ने खुद संभाली कमान
पिछले चार दिनों से गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। लगभग 4,500 फैक्ट्रियों के 50,000 से अधिक मजदूर अपने कम वेतन को लेकर सड़कों पर थे। सोमवार को यह आंदोलन तब उग्र हो गया जब आक्रोशित श्रमिकों ने लगभग 500 फैक्ट्रियों पर हमला बोल दिया और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। औद्योगिक क्षेत्र में हिंसा की खबरें आते ही विपक्ष को राजनीति करने का अवसर दिखने लगा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया।
देर रात हुई रिपोर्ट और तत्काल फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव (ACS) समेत कई उच्चाधिकारियों ने आनन-फानन में श्रमिक प्रतिनिधियों और उद्योगपतियों के साथ लंबी बैठकें कीं। अधिकारियों ने देर रात अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना देर किए संज्ञान लिया और यह सुनिश्चित किया कि औद्योगिक शांति भी बनी रहे और मजदूरों को उनका अधिकार भी मिले।
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को मिला सबसे बड़ा तोहफा
योगी सरकार के इस निर्णय से सबसे ज्यादा खुशी पश्चिम यूपी के मजदूरों में है। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद, जो देश के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब हैं, वहां मजदूरी में ₹3000 की मासिक वृद्धि का निर्णय लिया गया है। यह कदम न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति सुधारेगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।
सम्पादकीय: क्यों जरूरी है यह फैसला?
उत्तर प्रदेश सरकार का ये निर्णय प्रदेश सरकार की लोककल्यान कारी सोच का परिचायक है। जहां पिछली सरकारों में ऐसे आंदोलन महीनों चलते थे और अंत में उद्योगों के पलायन या मजदूरों के दमन पर खत्म होते थे, वहीं योगी सरकार ने संवाद और संवेदनशीलता का रास्ता चुना।
एक तरफ उग्र भीड़ को नियंत्रित करना और दूसरी तरफ उनकी जायज मांगों को मानकर ₹3000 की वृद्धि करना, यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री के लिए प्रदेश का विकास और गरीब का पेट, दोनों सर्वोपरि हैं। यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो सोचते हैं कि हिंसा से व्यवस्था को झुकाया जा सकता है, और उन मजदूरों के लिए राहत की खबर है जो ईमानदारी से राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं।


