ग्रेटर नोएडा में लंबे समय से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे सैकड़ों फ्लैट खरीदारों के लिए यह एक महत्वपूर्ण खबर है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आवासीय परियोजना में हुई करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई की जांच के अनुसार, बिल्डर कंपनी ने ग्रेटर नोएडा के चाई-5 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-12 में हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के नाम पर निवेशकों और घर खरीदारों से बड़ी धनराशि वसूली थी। आरोप है कि कंपनी के निदेशक पीयूष तिवारी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने खरीदारों को लुभाने के लिए सुनियोजित साजिश रची। इस दौरान निवेशकों को फर्जी आश्वासन दिए गए, झूठे वादे किए गए और उन्हें गुमराह करने वाले बयान दिए गए।
जांच में सामने आया है कि भारी-भरकम राशि जमा कराने के बावजूद कंपनी ने न तो समय पर फ्लैट तैयार किए और न ही घर का कब्जा दिया, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
चार्जशीट में निजी बैंक के अधिकारी भी घेरे में
सीबीआई द्वारा दायर इस दूसरी चार्जशीट में न केवल बिल्डर कंपनी के निदेशकों को नामजद किया गया है, बल्कि इसमें एक निजी बैंक के अज्ञात अधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में ‘सबवेंशन स्कीम’ के तहत हुए फर्जीवाड़े की गहराई से जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई वर्तमान में ग्रेटर नोएडा की कुल 10 प्रमुख आवासीय परियोजनाओं में चल रही गड़बड़ियों की पड़ताल कर रही है।

आगे की कानूनी कार्रवाई
सीबीआई की गहन जांच के बाद दाखिल इस चार्जशीट ने बिल्डर समूह की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। अब अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। स्थानीय निवासियों और उन सैकड़ों पीड़ितों के लिए यह कदम उम्मीद की किरण माना जा रहा है, जिन्होंने अपना जीवन भर की कमाई इन प्रोजेक्ट्स में निवेश की थी।
सीबीआई के इस सख्त रुख से रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों में हड़कंप मच गया है। मामले की अगली सुनवाई और कोर्ट की टिप्पणियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


