नोएडा। नोएडा कमिश्नरेट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने जिले की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। हाल ही में हुए श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन को रोकने में पुलिस की कथित विफलता के बाद, कमिश्नर ने सेंट्रल नोएडा के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरा दी है।
बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चपेट में आए अधिकारी
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सेंट्रल नोएडा की डीसीपी शैव्या गोयल और एसीपी-1 सेंट्रल उमेश कुमार यादव को उनके पदों से हटा दिया है। शैव्या गोयल की जगह अब प्रभारी डीसीपी शैलेन्द्र को सेंट्रल नोएडा का नया डीसीपी नियुक्त किया गया है, वहीं दीक्षा सिंह को एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आपको बता दें कि मात्र दो सप्ताह पूर्व ही शक्ति मोहन अवस्थी के स्थानांतरण के बाद IPS शैव्या गोयल को सेंट्रल नोएडा की कमान सौंपी गई थी, लेकिन प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली ने पुलिस कमिश्नर को उन पर को कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया।
पुलिस की ‘विफलता’ और खुफिया तंत्र की नाकामी
सूत्रों का दावा है कि नोएडा में पुलिस के निचले और मध्यम स्तर के अधिकारी कमिश्नर लक्ष्मी सिंह तक जमीनी हकीकत पहुंचाने में लगातार कोताही बरत रहे थे। युवराज हत्याकांड के बाद हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान भी ऐसा ही हुआ। गुरुवार को जब पहली बार आंदोलन शुरू हुआ, तो स्थानीय पुलिस और एलआईयू ने कमिश्नर को सही फीडबैक नहीं दिया। जब लखनऊ से इस संबंध में जानकारी मांगी गई, तब कमिश्नर ने स्वयं मोर्चा संभाला और स्थानीय थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की। इसके बावजूद, पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आया, जिसका परिणाम सोमवार को हुआ उग्र प्रदर्शन और हिंसा के रूप में सामने आया।
हिंसा का मास्टरमाइंड एसटीएफ के शिकंजे में
प्रदर्शन की आड़ में हुई आगजनी और हिंसा के बाद कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने पूरी कमान अपने हाथों में ली और अपराधियों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ (STF) को सक्रिय किया। एसटीएफ ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इस पूरे उपद्रव के मास्टरमाइंड, आदित्य आनंद उर्फ ‘रस्टी’ को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया।
NIT जमशेदपुर का पूर्व छात्र और सॉफ्टवेयर इंजीनियर, आदित्य नोएडा सेक्टर-37 से रहकर मजदूरों को भड़काने का काम कर रहा था। उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आरोप है कि उसने ‘मजदूर बिगुल’ और ‘दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन’ जैसे वामपंथी संगठनों के साथ मिलकर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए हिंसा की साजिश रची थी। गिरफ्तारी के समय वह अपनी पहचान छिपाकर विदेश भागने की फिराक में था। उसके बचाव में तमिलनाडु तक बड़े वकीलों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि उसकी पहुंच और साजिशें कितनी गहरी थीं।
क्या आगे और भी गिरेगी गाज?
पुलिस सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ शुरुआत है। नोएडा पुलिस में सिस्टम को ‘रीबूट’ करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उन अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी जवाबदेही निभाने में लापरवाही बरती है।
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का यह कड़ा रुख स्पष्ट संकेत देता है कि नोएडा की शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले उपद्रवियों के साथ-साथ, अपनी जिम्मेदारी से बचने वाले अधिकारियों के लिए भी अब कोई जगह नहीं है।


