ब्राह्मण भला ना होय……. राजकुमार भाटी – ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी से बयानवीर बने माफ़ीवीर! माफी या मजबूरी? – “अभी तो हमें और जलील होना है।”

आशु भटनागर
6 Min Read

आशु भटनागर । “हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, हमारी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।” 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म दिलजले का यह डायलॉग आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर पूरी तरह सटीक बैठता है। बीते 10 वर्षों से सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रहे अखिलेश यादव के लिए चुनौती विपक्षी दल कम और उनकी अपनी पार्टी के ‘ प्रथम पंक्ति ने नेता’ अधिक नजर आ रहे हैं।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

2017 से 2022 तक: हार का वही पुराना पैटर्न

2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने जब 2017 का चुनाव हारा, तो इसकी एक बड़ी वजह घर के भीतर की कलह और पार्टी के कुछ नेताओं के विवादास्पद कार्यकलाप थे। लेकिन 2022 के चुनावों में जब समाजवादी पार्टी जीत के बेहद करीब दिख रही थी, तब स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के बयानों ने पासा पलट दिया। चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि मतदान से ठीक पहले अधिकारियों और सवर्ण वर्ग के बीच जो माहौल बना था, उसे इन बयानों ने भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण करने का मौका दे दिया। अब ठीक उसी राह पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता राजकुमार भाटी चलते दिखाई दे रहे हैं।

राजकुमार भाटी – ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी से बयानवीर बने माफ़ीवीर!

ताजा मामला जातियों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन का है। जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज की तुलना कथित तौर पर ‘वेश्याओं’ से कर दी। हालांकि उन्होंने इसे एक पुरानी घटना के संदर्भ में उद्धृत किया था, लेकिन इसने पार्टी के भीतर और बाहर एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।पूर्व सपा विधायक संतोष पांडेय ने कहा की राजकुमार भाटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है, वे जातीय वैमनस्य फैलाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के पदचिह्नों पर चल रहे है।

सपा के भीतर ही एक धड़ा यह मान रहा है कि भाटी ने यह बयान जानबूझकर दिया है। पार्टी के ब्राह्मण नेताओं का आरोप है कि जब अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ सवर्णों को जोड़ने और ब्राह्मणों के सम्मान की बात कर रहे हैं, तब ऐसे समय में 30-35 साल पुरानी किसी बात का जिक्र कर जहर घोलने की क्या आवश्यकता थी?

- Advertisement -
Ad image

माफी के बाद जहां एक और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पूरे प्रकरण पर मिट्टी डालो जैसा बयान देने की बातें शुरू करी है वहीं समाजवादी पार्टी के ही प्रचार कर रहे कई समर्थक पत्रकारों तक ने राजकुमार भाटी को सेल्फ गोल करने वाला नेता बता दिया है ।

पार्टी के भीतर ‘हमजा अली जरदारी’ की आहट?

समाजवादी पार्टी के समर्थको के बीच चर्चा है कि जिस तरह बंगाल चुनाव में भाजपा ने कुछ चेहरों को ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल किया, क्या उसी तर्ज पर विपक्षी दलों ने सपा के भीतर कुछ ‘छिपे हुए हमजा अली जरदारी’ बैठा रखे हैं? ब्राह्मण नेताओं का तर्क है कि राजकुमार भाटी कमोबेश स्वामी प्रसाद मौर्य की उसी लाइन पर चल रहे हैं, जिसने 2022 में पार्टी को सत्ता की दहलीज से दूर कर दिया था।

माफी या मजबूरी? – “अभी तो हमें और जलील होना है।”

विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी की स्थिति तनु वेड्स मनु की फिल्म के उस दृश्य जैसी हो गई है जहां अभिनेत्री कहती है, “अभी तो हमें और जलील होना है।” पार्टी सूत्रों की माँने तो ब्राह्मण नेताओं द्वारा उन्हें, सस्पेंशन, निष्काशन, राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटाने की मांग के बाद भाटी बैकफुट पर आ गए हैं। देर शाम उन्होंने न केवल सफाई दी, बल्कि माफी भी मांगी। उनका तर्क है कि 9 मिनट के भाषण में से केवल 7 सेकंड की क्लिप चलाकर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। पर सवाल वही है—चुनावी आहट के बीच इस तरह के विवादास्पद प्रसंग छेड़ने की जरूरत ही क्या थी?

ज्योतिष और राजनीति का मेल, सूर्य की ख़राब दशा राजकुमार भाटी के लिए अशुभ!

इस बीच, राजकुमार भाटी के इस विवाद पर कटाक्ष करते हुए एक ज्योतिषी ने कहा कि ऐसा लगता है कि “राजकुमार भाटी इस समय सूर्य की खराब दशा से गुजर रहे हैं ऐसे जातक अक्सर अपनी बातों से शीघ्र विवादों में घिर जाते हैं । ज्योतिष और भविष्य को लेकर भी राजकुमार भाटी ने बीते दिनों भले ही तमाम हास-परिहास की बातें की हो किंतु फिलहाल इस बात से सहमत हुआ जा सकता है। देखा जाए तो राजकुमार भाटी कुछ समय से लगातार मेहनत के बावजूद न सिर्फ विवादों में गिरते रहे हैं बल्कि मेहनत के परिणाम नकारात्मक भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में क्या समाजवादी पार्टी उन्हें ब्राह्मण नेताओ की मांग पर प्रवक्ता पद से हटाकर कुछ समय आराम करने को रहेगी या फिर समाजवादी पार्टी भी तनु वेड्स मनु के उसे बयान को आत्मसात कर लेगी कि “अभी तो हमें और जलील होना है”

Share This Article
आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे