उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में भाजपा का राजनीतिक रसूख भले ही बुलंदियों पर हो, लेकिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली ऐतिहासिक उड़ान के दौरान जो नजारा दिखा, उसने पार्टी के भीतर मचे घमासान को सड़क पर ला दिया है। जेवर एयरपोर्ट से पहली उड़ान के अवसर पर जिले के दिग्गज जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने अब जिले से लेकर लखनऊ तक भाजपा के गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। इन सबके केंद्र में हैं जिले के प्रभारी मंत्री कुंवर ब्रजेश सिंह, जिनकी कार्यशैली और समन्वय क्षमता पर अब गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
ऐतिहासिक अवसर, लेकिन अधूरा प्रतिनिधित्व
पूरा देश देख रहा था कि जेवर एयरपोर्ट का सपना हकीकत में बदल रहा है, लेकिन मंच पर जिले की वह एकजुटता गायब थी जिसके लिए भाजपा जानी जाती है। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री कुंवर ब्रजेश सिंह और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह (जिन्हें मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है) के साथ केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री तो मौजूद रहे, लेकिन जिले के अन्य कद्दावर चेहरों का न होना सबको खटक गया।
सांसद डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, दादरी विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी नरेंद्र भाटी, एमएलसी श्रीचंद शर्मा और यहाँ तक कि भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा जैसे प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति ने प्रशासन और संगठन के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया है।
प्रभारी मंत्री की विफलता या सोची-समझी रणनीति?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर इतने बड़े ऐतिहासिक आयोजन से पहले प्रभारी मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका स्पष्ट क्यों नहीं की? भाजपा के भीतर चर्चा है कि प्रभारी मंत्री आमतौर पर जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा से सलाह-मशविरा करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने जानबूझकर समन्वय स्थापित करने की कोशिश नहीं की।

लखनऊ तक यह बात पहुँच चुकी है कि जब जिले के इतने बड़े नेता कार्यक्रम से नदारद थे, तब प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर जवाब क्यों नहीं मांगा? क्या प्रभारी मंत्री ने यह जानने की जहमत उठाई कि क्या सभी जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और निमंत्रण दिया गया था?
बढ़ती दूरियां और उभरते शक्ति केंद्र
गौतमबुद्धनगर में विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती यह खेमेबंदी भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। जिले में यह धारणा प्रबल हो रही है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग ‘शक्ति केंद्र’ (Power Centers) सक्रिय हैं। आरोप है कि प्रभारी मंत्री इन मतभेदों को सुलझाने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। वे जिले के दौरों पर तो लगातार आ रहे हैं, लेकिन संगठन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच जिस सेतु का काम उन्हें करना चाहिए, वह पूरी तरह टूट चुका है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की मांग अब जनता और भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता यह पूछ रहे हैं कि जब जिले के विकास के सबसे बड़े प्रतीक (एयरपोर्ट) के अवसर पर ही नेतृत्व एक मंच पर नहीं दिख सकता, तो आने वाले चुनावों में क्या स्थिति होगी?
नोएडा से लेकर लखनऊ तक यह स्वर मुखर हो रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। जानकारों का कहना है कि या तो प्रभारी मंत्री के ‘पेंच कसे’ जाने चाहिए या फिर किसी ऐसे अनुभवी चेहरे को जिले की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जो गुटबाजी को खत्म कर संगठन को एकजुट कर सके।
नोएडा एयरपोर्ट की पहली उड़ान जहाँ विकास की नई गाथा लिख रही है, वहीं यह गौतमबुद्धनगर भाजपा की अंदरूनी कलह और समन्वय के अभाव का भी गवाह बन गई है। यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी, तो यह ‘राजनीतिक सिरफुटौवल’ आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है।


