लखनऊ में आग के बाद योगी का कड़ा फ़ायर‑सेफ़्टी आदेश – बेसमेंट‑कोचिंग पर रोक, “तेरा खून कब खोलेगा ……” जनता नोएडा‑ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियो से पूछ रही सवाल

आशु भटनागर
8 Min Read

लखनऊ के अलीगंज स्थित लाक्षागृह बने गेमिंग जोन में 12 अप्रैल को लगी भयानक आग ने न सिर्फ 15 मासूमो को मारा है बल्कि उनके परिवारों को कभी भी न ख़तम होने वाला दुःख दिया है इस दुखद घटना के बाद उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर में “बेसमेंट‑कोचिंग या किसी भी व्यावसायिक गतिविधि को रोकने” का मौखिक आदेश दिया, तथा फ़ायर‑सेफ़्टी ऑडिट को मिशन मोड में चलाने का निर्देश दिया।

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उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में योगी ने कहा, “लखनऊ में हुई त्रासदी को एक बड़ा सबक बनाकर, यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न दोहराई जाए। सार्वजनिक तथा निजी प्लॉट में बेसमेंट में कोचिंग, नर्सिंग होम या किसी भी प्रकार की व्यावसायिक इकाई को बिना योग्य फ़ायर‑सेफ़्टी प्रमाणपत्र के संचालित नहीं किया जाएगा।” उन्होंने सभी जिलाधीशों, नगर निगमों और सरकारी‑खानदानी एजेंसियों को “एक व्यापक जागरुकता अभियान” चलाने का आदेश दिया, साथ ही “किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए” की बात दोहराई।

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लखनऊ में तेज़ कार्यवाही

लखनऊ में जाँच आयोग ने पहले ही जिले के 86 सार्वजनिक भवनों तथा निजी संस्थानों पर फायर‑सेफ़्टी ऑडिट किया है। 120 से अधिक उल्लंघन मिलें, जिनमें बेसमेंट में बिना अनुमति के कोचिंग क्लास, मेडिकल कॉलेज के प्रयोगशालाएं और शॉपिंग मॉल के अनधिकृत स्टोरेज स्पेस शामिल हैं। अब त्रैमासिक रिपोर्ट के साथ विभागीय कारवाई तेज़ी से शुरू हो गई है।

परंतु सवाल वही है – नोएडा‑ग्रेटर नोएडा में क्यों खड़ी है दीवार?

जब लखनऊ में निषेधाज्ञा तक की तेज़ चाल चल रही है, तो उत्तर प्रदेश के निकट स्थित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दो प्रमुख शहर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा, उसी दिशा‑परिवर्तन को देखने को नहीं मिल रहा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में टाउन प्लानिंग को देखने वाले ओएसडी (OSD) और जीएम स्तर के अधिकारी इस बात से बेखबर हैं कि उनके अधिकार क्षेत्र में नियम कानूनों की धज्जियां कैसे उड़ रही हैं। अवैध क्षेत्र और आबादी की जमीन पर खड़े बैंक्वेट हॉल और कॉम्प्लेक्स किसी बारूद के ढेर से कम नहीं हैं। विडंबना यह है कि जब कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो यही अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं और सत्ता से अपने संबंधों की आड़ में बच निकलते हैं।

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हकीकत यह है कि फायर विभाग केवल अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जांच कर सकता है, भू-उपयोग (Land Use) का उल्लंघन रोकना प्राधिकरण के प्लानिंग विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जानकारों का कहना है कि प्लानिंग विभाग केवल ‘अनुमति’ देने की मशीन बनकर रह गया है, जहां अवैध निर्माणों को संरक्षण देना एक फितरत बन गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगर इन शहरो में चुस्त वयवस्था बनाना चहते है तो राजनैतिक दबाबो को दरकिनार कर उन्हें ऐसे सेवानिवृत अधिकारियो के सेवाविस्तार को रोककर मुख्य भूमिकाओ से हटाना पड़ेगा

प्लानिंग विभाग की लापरवाही – दोनों शहरों के प्लानिंग विभाग पर वर्षों से “भ्रष्टाचार के आरोप” लगे हुए हैं। सूचना के अनुसार, कई अस्पतालों, नर्सिंग होमों और कोचिंग संस्थानों को बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ‘पॉइंट‑ऑफ़‑लेवल’ अनुमति दी गई, जबकि वास्तविक फ़ायर‑सेफ़्टी कोड का पालन नहीं किया गया।

फ़ायर विभाग की सीमित भूमिका – प्रदेश सरकार के निर्देशों के बावजूद, फ़ायर विभाग केवल “अधिकतम अग्नि‑सुरक्षा मानक” की जाँच पर ध्यान देता है, न कि बेसमेंट में अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग को रोकता है। इस अंतर के कारण, कई संस्थानों को बिना उचित बुनियादी ढाँचा के कार्य करने की अनुमति मिल जाती है ।

व्यावसायिक अतिक्रमण का लैंडस्केप – सेक्टर 12 (नोएडा) में एक‑तीन मंजिला मार्केट, अल्फा‑सेक्टर (ग्रेटर नोएडा) में पीजी‑होस्टल और कई सिंगल‑फ़्लोर मकानों के बेसमेंट में अनधिकृत मार्किट स्थापित हो चुके हैं। नोएडा में ही एक बड़े अस्पताल मेट्रो अस्पताल पर तमाम अन्मित्त्ताओ के आरोप ई पर प्लानिंग विभाग प्रोजेक्ट पर और प्रजेक्ट प्लानिंग विभाग पर ठीकड़ा फोड़ देता है, ऐसे ही ग्रेटर नोएडा में तो ट्रस्ट के नाम पर मेडकल कालेज बनाने के लिए भूमि लेने वाला शारदा अस्पताल एक ब्लाक में शारदा केयर नाम से 5 स्टार अस्पताल खोल देता है पर अधिकारियो को दिखाई नहीं देता है ।ऐसे अनगिनत मामलो पर सम्भवत: स्थानीय राजनैतिक दबाव, साथ ही “आँखे बंद रखने ‑के‑लिए‑भुगतान” की लत, इस अराजकता को बढ़ावा दे रही है।

क्यों नहीं हो रहा है सख़्त कार्य?

राजनीतिक दबाब – दोनों क्षेत्रों के विकास मॉडल में “रियल एस्टेट बूम” प्रमुख है, जहाँ वर्गीकृत भूमि पर अधिकतम प्रदूषण‑रहित उपयोग के लिये नियमों का मोड़ दिया जाता है।दावा है ऐसे मामलो पर स्थानीय नेताओ से लेकर औधोगिक मंत्री ओर जिला प्रभारी तक का राजनैतिक दबाब भी अधिकारियो पर बना रहता है, समीक्षा बैठक के नाम पर नेता अधिकारियो को अपने चहेतों की फ़ाइल देकर चले जाते है।
विभागीय टकराव – प्लानिंग, फ़ायर, स्वास्थ्य और शैक्षिक विभागों के बीच स्पष्ट ज़िम्मेदारी का अभाव है। आधी अधूरी औपचारिक कार्यवाही, सैटिंग वाला समझौता।

जनता की आवाज़

नोएडा के निवासी अंजली वर्मा (सेक्टर 12) ने कहा, “हम अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कोचिंग क्लासेस की तलाश में हैं, पर अब हमारे घर के बेसमेंट में ऐसे गतिविधियों को होते देख डर महसूस कर रहे हैं। बड़े बड़े अस्पताल तक बेसमेंट में ओपीडी चला रहे है, सुरक्षा के नाम पर हमें क्या क्या खतरा उठाना पड़ेगा?”

ग्रेटर नोएडा के एक फायर अधिकारी, ने खुलासा किया, “अगर क़ानूनी तौर पर बेसमेंट में कोचिंग, नर्सिंग होम नहीं चलनी चाहिए, तो हमें कौन रोक सकता है? किन्तु वर्तमान में प्राधिकरण स्तर कोई सख्त पर जाँच नहीं है, और हमें डर है कि कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।”

युवा एकता मंच के राहुल शर्मा कहते हैं प्राधिकरणों को भ्रष्टाचार से फुर्सत मिले तो वो अवैध कायो पर रोक लगाये किन्तु प्राधिकरण के अधिकारियो की शह और संरक्षण में ही ऐसे सभी व्यावसायिक गतिविधियों का सञ्चालन किया जा रहा है।”

आगे का मार्ग – सार्वजनिक दबाव को बढ़ाएँ

एकीकृत निरीक्षण बोर्ड – राज्य के ‘फ़ायर‑सेफ़्टी मिशन’ को नोएडा‑ग्रेटर नोएडा के लिए भी विस्तारित कर, एक संयुक्त निरीक्षण टीम गठित की जाए, जिसमें फ़ायर, प्लानिंग और प्राधिकरण के अधिकारी शामिल हों।
साक्ष्य‑आधारित कार्रवाई – शहरी नियोजन के तहत ‘भ्रष्टाचार के मामले’ को पुलिस‑केंद्रित जांच के तहत लाया जाए, तथा अनधिकृत बेसमेंट उपयोग के लिये तत्काल बंदी आदेश जारी किया जाए।
जनजागरूकता अभियान – स्थानीय मीडिया, स्वैच्छिक संगठनों और स्कूल‑कॉलेजों के सहयोग से ‘बेसमेंट‑कोचिंग नहीं, जीवन‑सुरक्षा हाँ’ अभियान चलाया जाए।

लखनऊ में योगी आदित्यनाथ के त्वरित फ़ायर‑सेफ़्टी आदेश ने दर्शाया कि जब विक्षुब्ध घटनाएँ सामने आती हैं, तो सरकार जिम्मेदारी से जवाब देती है। वही दृढ़ संकल्प अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों पर भी लागू होना चाहिए। तभी नागरिकों को बेतहाशा बेसमेंट‑कोचिंग, अनधिकृत मार्किट और अवैध पीजी‑होस्टल से उत्पन्न जोखिमों से सुरक्षा मिल सकेगी।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे