प्रदूषण और धूल की मार झेल रहे ग्रेटर नोएडावासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। शहर की हवा को स्वच्छ बनाने और सड़कों को धूल मुक्त करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक बड़े और विशेष संयुक्त सफाई अभियान का बिगुल फूंक दिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुआ यह अभियान न केवल शहर की सूरत बदलने का दम रखता है, बल्कि यह प्रशासन की पर्यावरण के प्रति बढ़ती संजीदगी को भी दर्शाता है।
17 दिनों का महा-अभियान: केवल दिखावा नहीं, बदलाव की कोशिश
अक्सर सरकारी अभियान कागजों तक सिमट कर रह जाते हैं, लेकिन 24 जून से शुरू हुआ और 11 जुलाई तक चलने वाला यह अभियान अपनी व्यापकता के कारण चर्चा में है। प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें स्वास्थ्य, परियोजना और उद्यान विभाग की टीमें एक साथ समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें ‘मैकेनिकल स्वीपिंग’ के साथ-साथ ‘मैनुअल स्वीपिंग’ और सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इतना ही नहीं, अभियान के तहत 8 दिन बाद दोबारा सफाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धूल का नामोनिशान मिट चुका है। यह एक सराहनीय पहल है क्योंकि केवल एक बार की सफाई धूल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती।
इन प्रमुख सड़कों पर है पैनी नजर अभियान के पहले चरण में ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट की 37 महत्वपूर्ण सड़कों को चिह्नित किया गया है। इनमें एपेक्स कोर्ट सोसाइटी से एसकेए ग्रीन, 130 मीटर रोड, सूरजपुर एंट्री पॉइंट से कासना टी पॉइंट, और नॉलेज पार्क-5 जैसी व्यस्त सड़कें शामिल हैं। इन इलाकों में निर्माण कार्यों और भारी यातायात के कारण धूल की समस्या सबसे गंभीर रहती है। प्राधिकरण का इन विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना एक रणनीतिक रूप से सही फैसला है।

सड़क सुधार और ‘ग्रीनरी’: एक स्थायी समाधान की ओर
इस अभियान की एक और सकारात्मक कड़ी यह है कि स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर सड़क को ‘नो डस्ट’ (No Dust) घोषित करने से पहले उसकी बारीकी से जांच करेंगे। अभियान के नोडल ऑफिसर राजेश गौतम के अनुसार, अगर सड़क पर गड्ढे मिलते हैं, तो उन्हें भी तुरंत रिपेयर किया जाएगा।
वास्तव में, धूल का मुख्य कारण सड़कों के किनारे खुली पड़ी मिट्टी है। प्राधिकरण की ‘एंड टू एंड पेवमेंट’ और ‘ग्रासिंग’ (घास लगाना) की योजना इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकती है। अगर सड़कों के किनारों को पूरी तरह ढका गया, तो भविष्य में धूल उड़ने की संभावना काफी कम हो जाएगी।
जनता की भागीदारी भी है अनिवार्य प्राधिकरण की एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने इस अभियान में नागरिकों से सहयोग की अपील की है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासन कितनी भी सफाई कर ले, जब तक आम नागरिक कचरा न फैलाने और स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प नहीं लेंगे, तब तक ‘स्वच्छ ग्रेटर नोएडा’ का लक्ष्य अधूरा रहेगा।



