ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने और भूमि के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने उन 20 संस्थागत भूखंडों का आवंटन रद्द कर दिया है, जिन पर आवंटियों ने सालों से कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया था। यह कार्रवाई औद्योगिक भूखंडों के खिलाफ की गई पिछली समान कार्रवाई के बाद की गई है, जिससे प्राधिकरण की नियमों के प्रति सख्त रुख का पता चलता है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय एक व्यापक सर्वेक्षण के बाद लिया गया, जिसमें पाया गया कि बड़ी संख्या में आवंटी आवंटन के बाद भी अपनी भूमि का उपयोग नहीं कर रहे थे। कई भूखंड तो दस साल पहले आवंटित किए गए थे, लेकिन उन पर आज तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था, जिससे वे निष्क्रिय पड़े हुए थे।
प्राधिकरण ने पहले इन आवंटियों को नोटिस जारी कर निर्माण कार्य में देरी का संतोषजनक कारण बताने को कहा था। हालांकि, प्राप्त जवाबों को असंतोषजनक पाए जाने के बाद, प्राधिकरण ने निरस्तीकरण की अंतिम कार्रवाई करने का फैसला किया।
एसीईओ प्रेरणा सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि, “वर्षों पहले प्लॉटों का आवंटन किया गया था, लेकिन आवंटियों ने कोई काम नहीं किया। आवंटियों को संबंधित कार्यों को शुरू करने की सूचना भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप, 20 संस्थागत भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया गया है।” उन्होंने आगे बताया कि इन निरस्त किए गए भूखंडों को अब नई योजनाएं निकालकर दोबारा आवंटित किया जाएगा, ताकि विकास की गति बनी रहे।

यह नवीनतम कार्रवाई प्राधिकरण के औद्योगिक विभाग द्वारा की गई पिछली कार्रवाई का अनुसरण करती है, जिसने उद्योग शुरू न करने वाले 20 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी रद्द कर दिया था। यह स्पष्ट है कि प्राधिकरण हर श्रेणी के आवंटियों पर नियमों का पालन न करने पर शिकंजा कस रहा है।
प्राधिकरण के सीईओ एन.जी. रवि कुमार ने इस संबंध में अपनी दृढ़ता व्यक्त करते हुए कहा, “नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की गई है और यह कार्रवाई जारी रहेगी। भूखंड लेने का उद्देश्य उस पर निर्माण करना और संबंधित गतिविधि शुरू करना होना चाहिए, न कि उसे अनिश्चित काल तक खाली रखना।” उन्होंने यह भी reiterated किया कि आवंटन के पांच वर्ष तक निर्माण कार्य करना अनिवार्य है, जिसके बाद जुर्माने का प्रावधान है।



