दादरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले और जिले के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र ‘ग्रेटर नोएडा वेस्ट’ में अब एक नई राजनीतिक चेतना जागृत हो रही है। पिछले 15 वर्षों से लगातार हो रही उपेक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से त्रस्त होकर अब यहाँ के निवासियों ने इस क्षेत्र को एक अलग विधानसभा क्षेत्र बनाने की मांग तेज कर दी है।
विधायक पर ‘ग्रामीण तुष्टीकरण’ और उपेक्षा के आरोप
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों का सीधा आरोप है कि दादरी विधायक का पूरा ध्यान केवल ग्रामीण क्षेत्रों और अपने पारंपरिक वोट बैंक पर केंद्रित रहता है। निवासियों का कहना है कि वे बार-बार अपनी समस्याओं को लेकर प्राधिकरण और विधायक के पास जाते हैं, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया जाता है।
आंकड़ों पर गौर करें तो दादरी विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में विधायक के कार्यकाल के दौरान सरकारी स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंची हैं, लेकिन लगभग 15 लाख की आबादी वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आज भी एक अदद सरकारी अस्पताल, श्मशान घाट या सरकारी स्कूल तक नसीब नहीं हुआ है।
निजीकरण को बढ़ावा, आम जनता को ठेंगा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इस क्षेत्र में बड़े-बड़े बिल्डरों, निजी अस्पतालों और महंगे निजी स्कूलों को जमीन आवंटित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन आम जनता के लिए किसी भी प्रकार की सार्वजनिक व्यवस्था नहीं की गई। यहाँ के निवासियों को नोएडा के मुकाबले, मेट्रो ट्रेन जिला अस्पताल, अंतिम निवास जैसा शमशान घाट स्टेडियम, रामलीला मैदान और पार्कों जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र से 100 प्रतिशत वोट भाजपा को गया है, राजनीतिक रूप से दादरी विधायक इन मुद्दों को हल कर सकते थे, लेकिन उनके एजेंडे में शहरी वोटर्स की प्राथमिकता नहीं दिखती।

नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने शुरू किया अभियान
पूरे मामले को लेकर ‘नोएडा एस्टेट फ्लैट ओनर्स एसोसिएशन’ (NEFOWA) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ दी है। अभिषेक हाल ही एनसीआर खबर द्वारा सोशल मीडिया X पर किये गए सर्वे “दादरी विधान सभा सीट पर पसंदीदा विधायक प्रत्याशी कौन?” में शीर्ष 3 लोगो में शामिल रहे है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक इसका परिसीमन (Delimitation) कर इसे एक अलग विधानसभा क्षेत्र नहीं बनाया जाता।
अभिषेक कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X अपनी पोस्ट में सवाल उठाते हुए लिखा, “ग्रेटर नोएडा वेस्ट का विकास आखिर कब होगा? यहाँ के लोगों को शुरुआत से ही अपनी हर बुनियादी ज़रूरत के लिए संघर्ष करना पड़ा है। घरों के कब्ज़े से लेकर, सिटी बस सेवा, श्मशान घाट, अस्पताल, स्टेडियम और मेट्रो तक के लिए हमें सड़कों पर उतरना पड़ता है। आखिर पूरे ज़िले में सबसे अधिक उपेक्षा इसी क्षेत्र की क्यों होती है?”
यहाँ लाखों लोग रहते हैं, लगातार आबादी बढ़ रही है, फिर भी सुविधाओं के मामले में यह क्षेत्र हमेशा पीछे क्यों रखा जाता है?
अभिषेक कुमार, अध्यक्ष नेफोवा
क्या ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नागरिकों को हर अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर ही लड़ना पड़ेगा? जब तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट का परिसीमन कर इसे अलग विधानसभा नहीं बनाया जाएगा, तब तक इस क्षेत्र की आवाज़ हमेशा बंटी रहेगीl
अलग विधानसभा क्षेत्र की मांग क्यों?
निवासियों का तर्क है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आबादी अब इतनी बढ़ चुकी है कि इसे प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से एक स्वतंत्र इकाई की जरूरत है। वर्तमान में यह क्षेत्र दादरी का हिस्सा होने के कारण अपनी विशिष्ट पहचान और बजटीय आवंटन के लिए संघर्ष करता रहता है।
नोएडा एक्सटेंशन की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब इसके लिए अलग विधानसभा क्षेत्र बनाया जाए। हमें ऐसा विधायक चाहिए जिसका पूरा फोकस सिर्फ नोएडा एक्सटेंशन के विकास पर हो।
कपिल हिन्दुस्तानी, निवासी ग्रेटर नोएडा वेस्ट
दादरी के मा० विधायक तेजपाल नागर दादरी से सटे बिसाहड़ा मे सरकारी अस्पताल बनवाने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे। अस्पताल बन जाने से आसपास के 10-12 गांवों के लगभग 2 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। परंतु पिछले 7-8 वर्षों से ग्रेनो वेस्ट की 8-10 लाख जनता सरकारी मल्टी स्पैशलिटी अस्पताल की मांग कर रही उस पर दादरी विधायक मौन क्यों हैं? ग्रेनो वेस्ट मे सरकारी अस्पताल बनवाने के लिए दादरी विधायक प्रसयासरत क्यों नहीं है? क्या दादरी विधायक ग्रेनो वेस्ट को अपना नहीं मानते? क्या ग्रेनो वेस्ट की जनता को महज वोट बैंक समझा जाता है? या फिर दादरी विधायक ग्रेनो वेस्ट मे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों को अपना प्रयास बता कर श्रेय लेने तक सीमित रहेंगे?
मनीष निवासी ग्रेटर नोएडा वेस्ट
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के फ्लैट खरीदारों और निवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि वे भारी टैक्स और रखरखाव शुल्क देते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें “कंक्रीट का जंगल” थमा दिया गया है। अब देखना यह होगा कि आगामी परिसीमन और चुनाव से पहले क्या सरकार इस बढ़ती मांग और उपेक्षा पर ध्यान देती है, या यहाँ के लाखों नागरिक अपनी उपेक्षा का जवाब आने वाले समय में अपने तरीके से देंगे।
अभिषेक कुमार का कहना है कि जब तक यह क्षेत्र अलग विधानसभा नहीं बनेगा, तब तक यहाँ की आवाज़ सत्ता के गलियारों में बंटी रहेगी और विकास के नाम पर केवल आश्वासन मिलते रहेंगे। ऐसे में विधान सभा चुनाव से पूर्व इस मांग से क्या ग्रेटर नोएडा को अलग विधान सभा बनाया जाएगा या भाजपा सरकार एक बार फिर से यहाँ के निवासियों, मेट्रो के वादे की तरह की नया लालीपाप दे देगी



