नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को निर्देश दिया है कि वे बिरोंडी, छपराउला, जीटी रोड, गुलिस्तानपुर और अन्य क्षेत्रों में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स की जांच करें। याचिका के अनुसार, कई प्रोजेक्ट्स अथॉरिटी और बोर्ड द्वारा काम रोकने (बंदी) के आदेश और भारी जुर्माना लगाए जाने के बावजूद लगातार चल रहे हैं।
एनजीटी ने इस मामले में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त रूप से जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
बिना मंजूरी चल रहे निर्माण कार्यों पर सुनवाई
एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका भाजपा नेता और पूर्व म्युनिसिपल कॉरपोरेटर राजेंद्र त्यागी की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने ट्रिब्यूनल के समक्ष दलीलें पेश कीं।
सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी (GNIDA) ने ट्रिब्यूनल को बताया कि वह नियमों के उल्लंघन में किए जा रहे निर्माण कार्यों से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रही है। अथॉरिटी ने ऐसी सभी परियोजनाओं की पहचान कर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा, जिसे ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर लिया।

इन 5 बड़ी परियोजनाओं पर लगा है जुर्माना और बंदी का आदेश
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने यूपीपीसीबी के 25 मार्च के हलफनामे का हवाला दिया। इस हलफनामे में पांच ऐसी निर्माणाधीन परियोजनाओं की पहचान की गई थी, जिन्हें बंद करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि वहां अभी भी निर्माण कार्य जारी है। इन परियोजनाओं और उन पर लगाए गए जुर्माने का विवरण इस प्रकार है:
मेसर्स गाजियाबाद एंड डेवलपर्स बिल्डर्स (छपराउला गांव में द्वारका सिटी कॉलोनी या समतेल एन्क्लेव का निर्माण): इस प्रोजेक्ट पर बंदी का आदेश और 21.40 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा (जुर्माना) लगाया गया है।
भगवती डेवलपर्स: इस पर भी बंदी का आदेश और 21.40 लाख रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया है।
मेसर्स सहारा एन्क्लेव/सिटी (जीटी रोड के किनारे): बंदी के आदेश के साथ 21.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
मेसर्स पीपी एस्टेट: इस प्रोजेक्ट को बंद करने का आदेश और 15 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा जारी किया गया था।
मेसर्स एस्कॉन प्राइड विला: इस पर बंद करने के आदेश के साथ 10.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
ट्रिब्यूनल का आदेश
एनजीटी ने सोमवार को जारी अपने आदेश में यूपीपीसीबी को सख्त निर्देश दिया है कि वह इस बात की गहनता से जांच करे कि ये प्रोजेक्ट्स काम बंद करने के आदेश का उल्लंघन न कर सकें। स्थानीय निवासियों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना पर्यावरणीय नियमों और धूल नियंत्रण उपायों के चल रहे इन निर्माण कार्यों से क्षेत्र में वायु और पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। अब सभी की नजरें 24 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



