ग्राम बरौला में लंबे समय से चली आ रही जल भराव की समस्या और हालिया बारिश के बाद बिगड़े हालातों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जल निकासी व्यवस्था में लापरवाही और विकास कार्यों में शिथिलता को अक्षम्य मानते हुए प्राधिकरण प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल प्रभाव से गाज गिराई है।
लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: जेई और सुपरवाइजर की सेवा समाप्त
मामले की समीक्षा के दौरान सीईओ ने पाया कि क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ड्यूटी में घोर लापरवाही और काम के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने के कारण जूनियर इंजीनियर (JE) पार्थ राठौड़ और सुपरवाइजर मांगेराम की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।
इसके अलावा, जल भराव की स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहने पर प्रबंधक करण सिंह त्यागी (सिविल) और रमेन्द्र (जल/सीवर) को ‘प्रतिकूल प्रविष्टि’ (Adverse Entry) दी गई है, जो उनके करियर रिकॉर्ड पर गंभीर प्रभाव डालेगी।
कार्यदायी फर्म पर 5 लाख का जुर्माना, ब्लैकलिस्ट की तैयारी
प्राधिकरण ने न केवल अपने अधिकारियों बल्कि निजी फर्म पर भी शिकंजा कसा है। संबंधित क्षेत्र में काम कर रही फर्म मैसर्स वर्म इंडिया पर ₹5 लाख की भारी पेनल्टी लगाई गई है। साथ ही, कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि कार्य में निरंतर लापरवाही के लिए उन्हें ‘ब्लैकलिस्ट’ क्यों न कर दिया जाए।

सभी वर्क सर्किल को अंतिम चेतावनी
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इस कार्रवाई के माध्यम से पूरे प्राधिकरण अमले को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने सभी वर्क सर्किल के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि यदि भविष्य में किसी भी क्षेत्र में जल भराव या मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इससे भी अधिक कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
निवासियों को राहत देने का संकल्प
प्राधिकरण प्रशासन ने दोहराया है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र के निवासियों को जल भराव जैसी समस्याओं से स्थायी राहत दिलाना और विकास कार्यों में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। आज की इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, और उम्मीद की जा रही है कि इससे आने वाले समय में जल निकासी व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।



