आशु भटनागर। गौतम बुद्ध नगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक राजनीति में इन दिनों जबर्दस्त उथल-पुथल मची हुई है। जिले में वर्चस्व की जंग और गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। लंबे समय से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा के इर्द-गिर्द घूमने वाली जिले की राजनीति को चुनौती देने का एक नया अध्याय हाल ही में शुरू हुआ था। लेकिन शक्ति प्रदर्शन के अपने पहले ही प्रयास में राज्यसभा सांसद डॉ. सुरेंद्र नागर और नव-नियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर की जोड़ी का दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत समारोह को लेकर जिस तरह से दो बार तिथियां बदली गईं और पोस्टर विवाद खड़ा हुआ, उसने जिले की भाजपा राजनीति के खींचतान को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 1 और 4 अगस्त के बजाय 3 अगस्त को दादरी के आरवी नॉर्थलैंड कॉलेज में आयोजित किया जाएगा।
‘कैलाश पर्वत’ बनाम ‘शिवालिक की गलियां’: वर्चस्व की जंग
जिले में यह चर्चा आम रही है कि नवाब सिंह नागर के पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय अध्यक्ष बनने के बाद स्थानीय राजनीति की दिशा अब ‘कैलाश पर्वत’ (डॉ. महेश शर्मा) से नहीं, बल्कि ‘शिवालिक की गलियों’ से तय होगी। माना जा रहा था कि नवाब सिंह नागर, सांसद सुरेंद्र नागर और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह मिलकर जिले में नया राजनीतिक समीकरण बनाएंगे।
अपनी इसी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए दादरी के आरवी नॉर्थलैंड कॉलेज में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित करने की घोषणा 1 अगस्त के लिए की गई थी।

पोस्टर से गायब स्थानीय दिग्गज, यहीं से बिगड़ा खेल
विवाद की असली शुरुआत उस पोस्टर से हुई जो कार्यक्रम के प्रचार के लिए जारी किया गया था। इस पोस्टर में केंद्रीय और शीर्ष नेतृत्व के अलावा केवल प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद डॉ. सुरेंद्र नागर और क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर के फोटो थे।

हैरानी की बात यह रही कि पोस्टर में स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा, क्षेत्र के विधायकों और यहां तक कि भाजपा जिलाध्यक्ष तक की फोटो गायब थी। पार्टी सूत्रों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच तुरंत यह संदेश गया कि यह कार्यक्रम संगठन का न होकर एक खास गुट का व्यक्तिगत शक्ति प्रदर्शन है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या जिले के जनप्रतिनिधियों को इस आयोजन में कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है? हालांकि, आयोजकों ने सफाई दी कि चूंकि यह संगठन का कार्यक्रम है, इसलिए केवल संगठनात्मक पदाधिकारियों के चित्र लगाए गए हैं, लेकिन राजनीति में जो दिखता है, संदेश वहीं से जाता है।
तारीखों का ‘माइंड गेम’: 1अगस्त से 4अगस्त , फिर 10 बजे रात आया 3 अगस्त का संदेश
पोस्टर विवाद के तुरंत बाद अचानक 1 तारीख का कार्यक्रम रद्द होने की सूचना आई। आधिकारिक कारण लखनऊ में संगठन की बैठक और कांवड़ यात्रा को बताया गया। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन ने इस एकतरफा गुटबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसके बाद कार्यक्रम को रोकना पड़ा।
इसके बाद राजनीति का ‘शह और मात’ का खेल शुरू हुआ। पहले 4 अगस्त की तिथि प्रस्तावित की गई। कार्यकर्ता अभी 4 तारीख की तैयारी के बारे में सोच ही रहे थे कि रात 10 बजे नवाब सिंह नागर का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें कार्यक्रम की अंतिम तिथि 3 अगस्त घोषित की गई। महज कुछ दिनों के भीतर दो बार तारीख का बदलना यह साबित करने के लिए काफी है कि पर्दे के पीछे भारी राजनीतिक दबाव और खींचतान चल रही थी।
दूसरी तरफ, आयोजकों का दावा है कि 1 अगस्त की संगठनात्मक कार्यशाला के कारण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था और अब 3 अगस्त को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। दादरी में जनसभा स्थल, स्वागत द्वार और बैठकों का दौर जारी है। आयोजकों का कहना है कि यह केवल अभिनंदन समारोह नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन होगा।
स्थानीय निवासियों के मन में उठे बड़े सवाल!
क्या तीन बार तारीखें बदलने के बाद पार्टी कार्यकर्ता वाकई उसी उत्साह से इस कार्यक्रम में जुट पाएंगे?
क्या प्रदेश स्तर से उठे सवालों और स्थानीय नेताओं की अनदेखी से उपजे असंतोष को साध लिया गया है?
क्या 3 अगस्त का यह समारोह जिले में भाजपा की एकजुटता दिखाएगा या फिर अंदरूनी गुटबाजी की खाई को और गहरा कर देगा?
फिलहाल, 3 अगस्त को दादरी में होने वाला यह स्वागत समारोह यह तय करेगा कि गौतम बुद्ध नगर भाजपा की राजनीति किस करवट बैठेगी। क्या ‘नवाब और सुरेंद्र’ की जोड़ी अपनी इस पहली राजनीतिक परीक्षा में पास हो पाएगी या डॉ महेश शर्मा का राजनीतिक वर्चस्व बरकरार रहेगा, इस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हैं।



