नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, आज महाप्रबंधक (सिविल) ए.के. अरोड़ा द्वारा वर्षा के दृष्टिगत शहर के विभिन्न आवासीय, संस्थागत और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति का आकलन करना और नागरिक सुविधाओं को सुचारू बनाए रखना था।
निरीक्षण के दौरान वर्क सर्किल-8 के वरिष्ठ प्रबंधक रोहित सिंह, वर्क सर्किल-7 के वरिष्ठ प्रबंधक डी.एल. वर्मा, प्रबंधक मनीषा सिंह तथा संबंधित अवर अभियंता (जेई) मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
सड़कों की अस्थायी मरम्मत के लिए विशेष अभियान
अत्यधिक वर्षा के कारण सड़कों पर बने गड्ढों से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण द्वारा त्वरित पैचवर्क और अस्थायी मरम्मत का कार्य तेज कर दिया गया है। प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
त्वरित कार्रवाई: मानसून के दौरान मुख्य मार्गों और अंदरूनी सेक्टरों की सड़कों पर बने गड्ढों को तुरंत भरने के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा उपाय: हादसों को टालने के लिए चिन्हित खतरनाक गड्ढों पर प्राथमिकता के आधार पर मिट्टी, गिट्टी और कोल्ड मिक्स का उपयोग कर उन्हें समतल किया जा रहा है।

सेक्टर-105 में स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान
निरीक्षण के दौरान आवासीय सेक्टर-105 में एक विशेष सफाई और वृक्षारोपण अभियान का भी आयोजन किया गया। इस अभियान में स्थानीय निवासियों और स्कूली बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सामूहिक प्रयासों से सेक्टर-105 के सेंट्रल पार्क को ‘गार्बेज मुक्त’ (कचरा मुक्त) बनाया गया, जिसके तहत पार्क से लगभग 160 किलोग्राम कूड़ा एकत्र कर निस्तारित किया गया।
इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस अनीश दयाल, भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव व पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार, उद्यान विभाग के निदेशक आनंद मोहन सिंह तथा उप निदेशक प्रशांत सिंह ने भी सहभागिता की और पौधारोपण किया।
जलभराव की स्थिति और अंडरपास का निरीक्षण
भारी बारिश के चलते आज झट्टा अंडरपास का भी निरीक्षण किया गया। अत्यधिक वर्षा के कारण अंडरपास के आसपास की भूमि का जलस्तर बढ़ गया था। नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण द्वारा तत्काल पंप चालू करवाकर जल निकासी की गई और एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से आवागमन प्रतिबंधित किया गया।
इसके विपरीत, औद्योगिक क्षेत्र फेस-2 के निरीक्षण के दौरान मुख्य मार्गों पर कहीं भी जलभराव की स्थिति नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त टीम द्वारा सेक्टर-148, 150, 152 और ग्राम सफीपुर का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया।
अधिकारियों को कड़े निर्देश
महाप्रबंधक (सिविल) ए.के. अरोड़ा ने संबंधित स्टाफ और अभियंताओं को सभी सेक्टरों में निरंतर निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर टास्क फोर्स के माध्यम से त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।



